कमलनाथ ने राज्यपाल को पत्र लिखकर बताया- फ्लोर टेस्ट के मसले पर विधानसभा अध्यक्ष लेंगे फैसला
Bhopal: Madhya Pradesh Governor Lalji Tandon along with Chief Minister Kamal Nath and others arrives during the budget session of state assembly, in Bhopal, Monday, March 16, 2020. (PTI Photo)(PTI16-03-2020_000023B)
MP political crisis Kamal Nath wrote a letter : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर सूचित किया कि सदन में शक्ति परीक्षण कराने के संबंध में राजभवन से प्राप्त पत्र को उन्होंने निर्णय लेने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के पास भेज दिया है.
भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर सूचित किया कि सदन में शक्ति परीक्षण कराने के संबंध में राजभवन से प्राप्त पत्र को उन्होंने निर्णय लेने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के पास भेज दिया है. मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को आगे लिखा है, ‘‘सभी तथ्यों के आलोक में मैंने आपके निर्देश को समुचित निर्णय हेतु विधानसभा अध्यक्ष को अग्रेषित कर दिया है. मैं इस पत्र की भी एक प्रति उन्हें अंकित (भेज) कर रहा हूं.”
राज्यपाल टंडन ने कल मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उन्हें 17 मार्च मंगलवार को सदन में विश्वास मत हासिल करने के निर्देश दिये थे. उन्होंने लिखा था कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो माना जायेगा कि उसके पास बहुमत नहीं है. कमलनाथ ने लिखा है, ‘‘आपने अपने पत्र में यह खेद जताया है कि आपने जो समयावधि दी थी उसमें विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करने के बजाय मैंने आपको पत्र लिखकर शक्ति परीक्षण कराने में आनाकानी की. मैं आपके ध्यान में यह तथ्य लाना चाहूंगा कि पिछले 15 महीने में मैंने सदन में कई बार बहुमत सिद्ध किया है. अब यदि भाजपा यह आरोप लगा रही है कि मेरे पास बहुमत नहीं है तो वे अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से फ्लोर टेस्ट करा सकते हैं.
मेरी जानकारी में यह आया है कि उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिया है जो विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है.” हालांकि नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक नरोत्तम मिश्रा ने इसबात से इनकार किया है कि उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं बार-बार अपने पत्रों के जरिये और व्यक्तिगत रुप से आपसे भेंट कर उस असाधारण स्थिति के बारे में अवगत करवाता रहा हूं, जब कांग्रेस के 16 विधायकों को भाजपा नेता अपने साथ चार्टर्ड विमान से कर्नाटक, बेंगलुरु ले गए और वहां स्थानीय पुलिस की मदद से उन्हें होटल/ रिसॉर्ट में बंदी जैसी स्थिति में रखा. वहां उनसे कोई मिल नहीं सकता. उन्हें भोपाल आने से भी रोका जा रहा है.”
कमलनाथ ने आगे कहा, ‘‘मैं पुन: आश्वस्त करना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश के बंदी बनाए गए 16 कांग्रेसी विधायकों को स्वतंत्र होने दीजिए और पांच-सात दिन खुले वातावरण में बिना किसी डर-दबाव अथवा प्रभाव के उनके घर पर रहने दीजिए ताकि वे स्वतंत्र मन से अपना निर्णय ले सकें. आपका यह मानना कि दिनांक 17 मार्च 2020 तक मध्यप्रदेश विधानसभा में, मैं फ्लोर टेस्ट करवाऊं और अपना बहुमत सिद्ध करुं अन्यथा यह माना जाएगा कि मुझे वास्तव में विधानसभा में बहुमत प्राप्त नहीं है, पूर्णत: आधारहीन होने से असंवैधानिक होगा.”
उन्होंने लिखा है, ‘‘मुझे यह ज्ञात हुआ है कि भाजपा के नेतागणों ने न्यायालय में भी याचिका दायर की है.” मालूम हो कि इससे पहले भी राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को गत शनिवार को पत्र लिखकर सदन में 16 मार्च को राज्यपाल की अभिभाषण के बाद बहुमत साबित करने के निर्देश दिए थे. विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कोरोना वायरस के खतरे मद्देनजर केन्द्र सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए सोमवार को व्यापक जनहित में सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक के लिए स्थगित दी थी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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