Jharkhand News: झारखंड एसोसिएशन की दिल्ली में बैठक
दिल्ली में रहने वाले झारखंड के लोगों ने राज्य के विकास को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है. प्राकृतिक संपदा से भरपूर होने के बावजूद, पलायन और आर्थिक पिछड़ेपन पर हुई चर्चा में समाधान तलाशे गए.
Jharkhand: दिल्ली में रहने वाले झारखंड के लोगों को एकजुट करने, राज्य की कला और संस्कृति से जुड़ाव और राज्य के विकास में सहयोग देने के लिए झारखंड एसोसिएशन की ओर से हर साल कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. मंगलवार को एसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में राज्य के विकास को लेकर चर्चा की गयी.कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हजारीबाग के भाजपा सांसद मनीष जयसवाल ने कहा कि कई लोग मानते हैं कि हमारा प्रदेश उन्नत होता तो काम के लिए राज्य से बाहर झारखंड आने की जरूरत नहीं होती. खनिज के मामले में साधन-संपन्न होने के बावजूद झारखंड का सबसे रोजगार मुहैया कराने वाला क्षेत्र कृषि है. लौह अयस्क, यूरेनियम, सोना, अभ्रक, लाइम स्टोन, मैग्नीशियम जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. लेकिन राज्य के मेधावी छात्र से लेकर कम पढ़े-लिखे लोग भी पढ़ाई और काम के लिए बाहर जाते हैं. आलम यह है कि हजारीबाग, कोडरमा क्षेत्र के 80 फीसदी ड्राइवर मुंबई में काम करते हैं.

अविभाजित बिहार में जब औद्योगिकीकरण हुआ तो अधिकांश उद्योग झारखंड के हिस्से में आया. बोकारो, टाटा स्टील, सब झारखंड को मिला. विभाजन के बाद बिहार को बहुत कम उद्योग मिला. लेकिन समय के साथ बिहार आगे बढ़ गया और प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद झारखंड कई मायनों में बिहार से पीछे हो गया. इसके लिए झारखंड के लोग भी दोषी है. गठन के बाद कभी बहुमत वाली सरकार नहीं बनी. झारखंड के पांच इलाके कोल्हान, पलामू, संथाल, दक्षिणी और पश्चिमी छोटानागपुर. सभी का खानपान का तरीका अलग है. पांचों को अलग तरीके से विकास करना होगा. ऐसी सरकार बने सभी को लेकर साथ चल सके एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट सत्यप्रकाश ने कहा कि इस आयोजन में दिल्ली में रहने वाले और झारखंड से बड़ी संख्या में लोग आये हैं. उनका प्रयास है कि जो भी झारखंड के लोग हैं, उन्हें दिल्ली या देश में कही भी कोई जरूरत हो, तो एसोसिएशन की ओर से उनकी मदद करना. इसी उद्देश्य के तहत झारखंड एसोसिएशन का गठन किया गया है. उन्होंने प्रवासी लोगों से भी झारखंड के विकास में अपने अनुभव से लाभ पहुंचाने पर जोर दिया. . पलायन बड़ी चिंता का विषय इस मौके पर पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि झारखंड के हर जिले में खनिज संपदा का भंडार मौजूद है. जिससे भारत की संस्कृति और उद्योग को बढ़ावा मिल रहा है. झारखंड प्राकृतिक तौर पर समृद्ध है, लेकिन वहां के लोग गरीब है.

झारखंड के संसाधन दूसरे राज्यों में लोगों को नौकरी मुहैया कराने का काम कर रहे है. लेकिन विडंबना है कि राज्य के लोग काम करने के लिए पलायन करने को मजबूर है. झारखंड की विशिष्ठ पहचान है. कई ऐसे पर्व जैसे सोहराय, सरहुल जैसे पर्व जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं. राज्य की संस्कृति बचाने का काम झारखंड एसोसिएशन कर रहा है. झारखंड सोने की धरती है. कोयला और अन्य खनिज का भरमार है. लेकिन जैसा विकास होना चाहिए वैसा नहीं हुआ. इसके कारण राज्य के लोग दूसरे जगह पर काम करने काे मजबूर है. अलग राज्य बनने के बाद भी उम्मीद के मुताबिक विकास नहीं हो पाया. हजारों लड़कियां काम करने आती है और मानव तस्करी का शिकार बन जाती है. आदिवासी और अन्य समुदाय का विकास नहीं हो पा रहा है. खुशी की बात है कि बाहर रह रहे लोग राज्य के विकास की चिंता कर रहे हैं.
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