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Jammu Kashmir News: यासीन मलिक के घर के बाहर नारेबाजी, आगजनी व पथराव के मामले में अब तक 19 गिरफ्तार

टेरर फंड‍िंग मामले में अलगाववादी नेता यासीन मल‍िक (Yasin Malik) को सुनाई गई उम्रकैद की सजा के विरोध में नारेबाजी और पथराव करने के आरोप में श्रीनगर पुलिस ने अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया है.

By Prabhat khabar Digital
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Jammu Kashmir News: यासीन मलिक के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन मामले में 19 अरेस्ट
Jammu Kashmir News: यासीन मलिक के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन मामले में 19 अरेस्ट
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Jammu Kashmir News: टेरर फंड‍िंग मामले में अलगाववादी नेता यासीन मल‍िक (Yasin Malik) को सुनाई गई उम्रकैद की सजा के विरोध में नारेबाजी और पथराव करने के आरोप में श्रीनगर पुलिस ने अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया है. श्रीनगर पुलिस ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि इन सभी पर 25 मई को यासीन मलिक के घर के बाहर आगजनी, पथराव, नारेबाजी के मामले में गिरफ्तार किया गया है.

मैसूमा में मलिक के आवास के बाहर बड़ी संख्या में जमा हुए थे लोग

श्रीनगर पुलिस के मुताबिक, यासीन मलिक को सजा सुनाए जाने के पहले ये सभी आरोपित उसके घर के बाहर दंगा, देशविरोधी व सांप्रदायिक नारेबाजी और गुंडागर्दी में शामिल थे. दरअसल, यासीन मलिक पर कोर्ट के फैसले से पहले श्रीनगर के कुछ हिस्से बंद रहे थे और शहर के मैसूमा इलाके में जेकेएलएफ अध्यक्ष मलिक के समर्थकों एवं सुरक्षा बलों के बीच झड़प भी हुई थी. बताया गया कि लाल चौक से कुछ ही दूरी पर स्थित मैसूमा में मलिक के आवास के बाहर बड़ी संख्या में महिलाओं समेत लोग जमा हो गए. साथ ही अलगाववादी नेता के समर्थन में नारेबाजी की और इलाके में विरोध मार्च निकाला.

यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा

पुलिस के अनुसार, मैसूमा में सजा सुनाए जाने से पहले यासीन मलिक के घर के बाहर देश विरोधी नारेबाजी की गई. साथ ही पथराव किया गया. जबकि, अन्य सभी इलाकों में माहौल शांतिपूर्ण रहा था. गौरतलब है कि दिल्ली की अदालत ने बीते दिनों अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा था कि यासीन मलिक की ओर से किए गए अपराधों का मकसद भारत के विचार की आत्मा पर हमला करना और भारत संघ से जम्मू-कश्मीर को जबरदस्ती अलग करने का था. विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने विधिविरुद्ध क्रियाकलाप रोकथाम अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत विभिन्न अपराधों के लिए अलग-अलग अवधि की सजा सुनाईं. न्यायाधीश ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की तरफ से की गई मृत्युदंड की मांग को खारिज कर दिया.

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