Jagannatha Temple Puri: पुरी के जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार खुलने से क्या होगा लाभ? जानें यहां
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 13 Jun 2024 2:15 PM
Puri: Devotees visit the Jagannath Temple, in Puri. All four gates of the 12th century shrine, which were closed since COVID-19 pandemic
Jagannatha Temple Puri: पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर को लेकर बड़ा फैसला बीजेपी की सरकार ने किया है. दरअसल, कोरोना काल में बंद किए गए शेष तीन द्वार को खोल दिया गया है. जानें इससे क्या होगा फायदा
Shree Jagannatha Temple Puri : ओडिशा में इस बार सरकार बदल गई है. यहां बीजेपी की सरकार बनी है जो लगातार जनता से संबंधित फैसले लेने में जुट गई है. इस क्रम में सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर को लेकर बड़ा फैसला लिया है. दरअसल, सरकार ने मंदिर के सभी चार द्वारों को फिर से खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, इसके बाद गुरुवार को प्रशासन की मौजूदगी में इसका पालन किया गया. इस अवसर पर खुद प्रदेश के नए सीएम मोहन चरण माझी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि कैबिनेट मीटिंग में जगन्नाथ मंदिर के 4 द्वारों को खोलने के लिए हमने प्रस्ताव रखा था और वो प्रस्ताव पारित हुआ और 13 जून को भक्तों की सुविधा के लिए चारों द्वार खोल दिए गए.
जानें आखिर क्यों बंद थे द्वार?
जगन्नाथ पुरी मंदिर की बात करें तो यहां कुल चार दरवाजे हैं. इनका नाम सिंह द्वार, अश्व द्वार, व्याघ्र द्वार और हस्ति द्वार है. कोरोना काल के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की ओर से सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए तीन द्वार बंद कर दिए थे जिसे अबतक नहीं खोला गया था. जब कोरोना महामारी का प्रभाव कम होने लगा तो केवल सिंह द्वार को ही खोलने का फैसला किया गया था. इसकी वजह से एक द्वार से भक्तों की एंट्री व एक्जिट थी. एक ही द्वार खुलने की वजह से श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए काफी इंतजार करना पड़ता था.

बीजेपी ने इसे अपने चुनावी मुद्दे में किया शामिल
पिछले दिनों ओडिशा में विधानसभा चुनाव हुए. चुनाव के दौरान पार्टियों ने कई तरह के वादे जनता से किए. बीजेपी ने चुनावों के दौरान वादा किया था कि उनकी सरकार बनते ही मंदिर के सभी दरवाजों को खोलने का काम किया जाएगा. वहीं चुनाव में जीत के बाद बीजेपी सरकार ने अपना वादा पूरा किया और 5 सालों से बंद जगन्नाथ पुरी के 3 अन्य द्वारों को खोलने का काम 13 जून की सुबह किया गया. ओडिशा की बीजेपी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 12वीं शताब्दी के इस मंदिर की तत्काल आवश्यकता के लिए एक निधि स्थापित करने का भी फैसला लिया.
क्या कहा सीएम मोहन चरण माझी ने
जगन्नाथ पुरी मंदिर के द्वार खुलने के वक्त सीएम मोहन चरण माझी के साथ बीजेपी सांसद संबित पात्रा के अलावा अन्य नेता मौजूद थे. सीएम मोहन चरण माझी ने इस दौरान कहा कि कैबिनेट की बैठक में जगन्नाथ मंदिर के सभी चार द्वार खोलने का प्रस्ताव रखा था, जो पारित हो गया और गुरुवार सुबह 6:30 बजे मैं अपने विधायकों और पुरी के सांसद (संबित पात्रा) के साथ ‘मंगला आरती’ में शामिल हुआ. उन्होंने आगे कहा कि जगन्नाथ मंदिर और अन्य कार्यों के विकास के लिए, हमने कैबिनेट में एक फंड का प्रस्ताव रखा है. जब हम अगला राज्य बजट पेश करेंगे, तो मंदिर प्रबंधन के लिए 500 करोड़ रुपये का एक कोष आवंटित करने का काम किया जाएगा.

कैबिनेट मंत्री सुरेश पुजारी ने क्या कहा
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, ओडिशा के दोनों उपमुख्यमंत्री, मंत्री, कई बीजेपी सांसद और पार्टी नेता मंदिर पहुंचे और भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की. इन्होंने मंदिर परिसर की परिक्रमा भी की. मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगी और जरूरत पड़ी तो मंदिर में श्रद्धालुओं के आवागमन को सुचारू बनाने के लिए और भी जरूरी कदम उठाएगी. वहीं कैबिनेट मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि यह जानने के लिए विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है कि कोरोना महामारी के बाद मंदिर के तीन द्वार फिर से क्यों नहीं खोले गए थे? हमने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए और उनसे मानव जाति की रक्षा करने और अगले पांच वर्षों तक ओडिशा के लोगों की सेवा करने की शक्ति देने का आशीर्वाद मांगा है.
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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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