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Indian Railways/IRCTC News: छोटे किसानों को रेलवे की सौगात, मौसमी फलों और सब्जियों से ट्रेनों को जोड़ने की तैयारी

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
IRCTC, Indian Railway News
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File Photo

नयी दिल्ली : रेलवे किसान ट्रेनों को मौसमी फलों और सब्जियों से जोड़ने पर विचार कर रहा है ताकि छोटे किसानों को लाभ हो सके. यह जानकारी रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने रविवार को दी. यह तब किया जा रहा है जब एक देश में एक बाजार के वादे के साथ लाये गये कृषि विधेयकों के लेकर राजनीतिक बवंडर उठा हुआ है. अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की पहली किसान ट्रेन आगामी दिसंबर और जनवरी में नागपुर से दिल्ली के लिए संतरा किसान विशेष ट्रेन और पंजाब से पश्चिम बंगाल एवं ओडिशा के लिए कीनू विशेष ट्रेन हो सकती है.

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने किसान रेल सेवा की शुरुआत की गई थी और अब तक किसानों का 4,100 टन उत्पाद देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से पहुंचाया गया है. अधिकारियों ने बताया कि अभी अंतिम रूपरेखा तय किया जाना बाकी है लेकिन साथ ही कहा कि उसे मौसमी उत्पादों के लिए समर्पित विशेष ट्रेन चलाने की व्यवहारिकता को लेकर जोनल रेलवे से प्रतिपुष्टि (फीडबैक) प्राप्त हुई है.

वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, ‘संतरा और कीनू विशेष रेलगाड़ी संभवत: पहली रेलगाड़ी होगी जिसका परिचालन किया जाएगा.' उन्होंने कहा, ‘हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ये रेलगाड़ियां छोटे किसानों के लिए फायदेमंद हो जो पूरी रेलगाड़ी की बुकिंग नहीं कर सकते हैं.' अधिकारी ने बताया, ‘वे इस सेवा में अपनी जरूरत के हिसाब से स्थान की बुकिंग कर सकते हैं.'

रेल से एक बार तीन किलो अनार भेजा गया था

आंकड़ों के मुताबिक किसान रेल से सबसे कम मात्रा में माल भेजने का रिकॉर्ड तीन किलोग्राम अनार का है जो महाराष्ट्र के नासिक से बिहार के मुजफ्फरपुर भेजा गया. इसी प्रकार 14 अगस्त को मनमाड से खंडवा 17 दर्जन अंडे भेजे गए. उल्लेखनीय है कि कुछ राज्यों में किसान संसद से हाल में पारित कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक का विरोध कर रहे हैं.

किसानों का आरोप है कि एक बार इन विधेयकों के लागू होने के बाद ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य' (एमएसपी) प्रणाली को खत्म करने का रास्ता साफ हो जाएगा और वे बड़ी कंपनियों की दया पर निर्भर हो जाएंगे. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि तीन किसान रेल- देवनहल्ली (कर्नाटक) से दानापुर(बिहार), अनंतपुर से दिल्ली, और यशवंतपुर से हजरत निजामुद्दीन- के बीच परिचालन में है और क्षमता के मुकाबले 85 प्रतिशत माल के साथ चल रही हैं.

अगले साल तक चलेंगी कई रेलगाड़ियां

अधिकारियों ने बताया कि संतरा विशेष और कीनू विशेष रेलगाड़ी के अलावा, आम विशेष रेलगाड़ी (आंध्र प्रदेश से दिल्ली के बीच, अप्रैल-जून में), प्याज विशेष रेलगाड़ी (नासिक से दिल्ली के बीच, मार्च-दिसंबर में),केला विशेष रेलगाड़ी (जलगांव से दिल्ली के बीच, मार्च-दिसंबर में), चीकू विशेष रेलगाड़ी (सूरत, वलसाड, नवसरी दिल्ली के बीच, अप्रैल-नवंबर में) चलाने पर भी विचार किया जा रहा है.

अधिकारियों ने बताया कि दूरी के साथ सामान भेजने का खर्च कम होता जाएगा. उन्होंने कहा कि 500 किलोमीटर तक की दूरी पर रेलगाड़ी से सामान भेजना महंगा है लेकिन करीब एक हजार किलोमीटर दूर सामान भेजना सड़क मार्ग के मुकाबले सस्ता है जबकि करीब 2000 किलोमीटर दूर सामान भेजना और भी सस्ता है क्योंकि सड़क मार्ग से कम से कम 1000 रुपये प्रति टन किराया लगता है.

अधिकारियों ने बताया कि किसान रेलगाड़ियों को शून्य आधारित समय सारिणी के आधार पर चलाया जाएगा जो जल्द प्रभावी होगा. इसका अभिप्राय है कि कोविड-19 महामारी के बाद नियमित रेलगाड़ियों का परिचालन भी अगर शुरू होता है तो किसान विशेष रेलगाड़ियों का समर्पित मार्ग पर पारिचालन जारी रहेगा. अधिकारी ने कहा कि सरकार और रेलवे किसानों की आय तेजी से बढ़ाने को लेकर कृतसंकल्प है और किसानों को अपना उत्पाद देश के किसी भी कोने में सबसे बेहतर कीमत पर बेचने की सुविधा देना इसका एक अहम तरीका है.'

Posted By: Amlesh Nandan.

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