Indian Railway : इंडिगो विमान की तरह ही रेलवे पर मंडरा रहा है खतरा?
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 09 Dec 2025 7:43 AM
रेलवे में इंडिगो जैसी स्थिति (File Photo)
Indian Railway : इंडिगो विमान में आ रही परेशानी के बीच अब भारतीय रेलवे को लेकर बड़ी खबर आ रही है. यूनियन की ओर से कहा गया है कि विमानन संकट रेलवे में लोको पायलटों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं जैसा ही है.
Indian Railway : इंडिगो के कामकाज में रुकावट से विमानन क्षेत्र में जो संकट दिखा है, उसे लोको पायलटों की समस्याओं से मिलती-जुलती स्थिति बताया गया है. एक प्रमुख लोको पायलट यूनियन ने कहा कि रेलवे के लोको पायलट भी लंबे समय से सुरक्षित कामकाज और वैज्ञानिक तरीके से तय कार्य घंटों की मांग कर रहे हैं. ‘ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन’ (AILRSA) ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि इंडिगो का विवाद केवल एयरलाइन सेक्टर का मुद्दा नहीं है, बल्कि सभी जोखिम वाले उद्योगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है. यूनियन का मानना है कि सुरक्षित और आरामदायक कामकाज जरूरी है, वरना ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आ सकती हैं.
रेलवे प्रबंधन के लिए आंखें खोलने वाला है इंडिगो संकट
एआईएलआरएसए के महासचिव के सी जेम्स ने एक बयान में कहा कि चाहे आसमान में हो या रेल पर, कामगार की थकान, सीधे यात्री सुरक्षा के लिए खतरे में बदल जाती है. आधुनिक निद्रा विज्ञान पर आधारित नियमन सिर्फ ड्यूटी से बचने के लिए यूनियन की मांग नहीं हैं. बल्कि, ये सुरक्षा मानकों की मांग हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा विमानन संकट रेलवे प्रबंधन के लिए आंखें खोलने वाला होना चाहिए. लाखों यात्रियों की ज़िंदगी एयरलाइंस से ज़्यादा लोको पायलटों की सतर्कता पर निर्भर करती है, क्योंकि रेलवे में प्रौद्योगिकीय तरक्की एयरवेज़ से कहीं कम है.
हर ड्यूटी के बाद पर्याप्त आराम मिलना चाहिए
विमानन संकट के बीच, यूनियन ने अपनी मांगों को दोहराया जैसे ज्यादा से ज्यादा दो लगातार रात की ड्यूटी, इंसानी शरीर के हिसाब से सही ड्यूटी घंटे और हर ड्यूटी के बाद पर्याप्त आराम, साथ ही सप्ताह में आराम का वक्त होना चाहिये. इसने अलग-अलग रेल दुर्घटनाओं की जांच का भी जिक्र किया, जिसमें चालक दल के कामकाज का वक्त, बेवक्त रहने की बात कही गई है. उन्होंने दावा किया कि 172 साल पुरानी रेलवे ने कभी भी अपने लोको पायलटों की ड्यूटी पर कामकाज का विश्लेषण करने की हिम्मत नहीं की.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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