1. home Hindi News
  2. national
  3. india nepal border dispute india rejects new map of nepal artificially enhanced land cannot be accepted

नेपाल के नये नक्शे पर भारत ने दिया कड़ा जवाब, भारतीय क्षेत्र को बताया था अपना हिस्सा

By Agency
Updated Date
नेपाली प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने मंगलवार को कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा नेपाल के हैं
नेपाली प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने मंगलवार को कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा नेपाल के हैं
FIle

नेपाल सरकार द्वारा लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को अपने नए राजनीतिक नक्शे में दिखाने पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने कहा है कि इस तरह से क्षेत्र में कृत्रिम विस्तार के दावे को स्वीकार नहीं किया जायेगा. साथ ही इस तरह के अनुचित मानचित्रण से पड़ोसी देश को बचने को कहा. भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब नेपाल सरकार ने अपने संशोधित राजनीतिक एवं प्रशासनिक नक्शे में लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपने क्षेत्र के तहत प्रदर्शित किया.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, इस तरह का एकतरफा कार्य ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित नहीं है. यह द्विपक्षीय समझ के विपरीत है जो राजनयिक वार्ता के जरिये लंबित सीमा मुद्दों को सुलझाने की बात कहता है. श्रीवास्तव ने नेपाल से भारत की सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने को कहा और उम्मीद जतायी कि नेपाली नेतृत्व लंबित सीमा मुद्दे के समाधान के संबंध में राजनयिक वार्ता के लिये सकारात्मक माहौल बनायेगा.

थल सेना प्रमुख ने कहा- किसी और के कहने पर नेपाल की बढ़ी हिम्मत

मानचित्र विवाद के बीच थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा है कि यह विश्वास करने के कारण हैं कि नेपाल ने किसी और के इशारे पर सड़क को लेकर आपत्ति जतायी है. जाहिर तौर पर उनकी टिप्पणी चीन की संभावित भूमिका के संदर्भ में थी. नेपाल और भारत के बीच विवादित सीमावर्ती क्षेत्र कालापानी के पास लिपुलेख दर्रा है. भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपने क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानते हैं.

भारत के अनुसार यह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है जबकि नेपाल उसके अपने धारचूला जिले का हिस्सा होने का दावा करता है. नेपाली प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने मंगलवार को कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा नेपाल के हैं और उन्होंने संकल्प लिया कि राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से भारत से उन्हें फिर से हासिल कर लिया जाएगा.

कैसे हुआ ये मामला शुरू

हाल ही में भारत ने लिपुलेख इलाके में एक सड़क का उद्घाटन किया था. लिपुलेख से होकर ही तिब्बत चीन के मानसरोवर जाने का रास्ता है. इस सड़क के बनाए जाने के बाद नेपाल ने कड़े शब्दों में भारत के कदम का विरोध किया था. इस सड़क का उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि कैलाश मानसरोवर यात्रा में समय कम लगेगा. दुर्गम रास्तों के सफर से अब नहीं गुजरना होगा.

Share Via :
Published Date
Comments (0)
metype

संबंधित खबरें

अन्य खबरें