Illegal Immigrants: उफनती नदी और जंगलों को किया पार, भूखे रहकर खाए लात-घूंसे, US से डिपोर्ट रॉबिन हांडा के पिता ने सुनायी आपबीती

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Illegal Immigrants: कई बाधाओं को पार करता रॉबिन जब अमेरिकी सीमा पर पहुंचा तब तक वह विभिन्न लोगों को 45 लाख रुपये का भुगतान कर चुका था. यहां तक की उसका फोन भी छीन लिया गया था. रॉबिन ने पिता ने यह दावा किया. इसके बाद रॉबिन को मैक्सिको में आव्रजन माफिया को सौंप दिया गया.

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Illegal Immigrants: अमेरिका से वापस आए 104 लोगों में हरियाणा के रॉबिन हांडा भी शामिल हैं. अमेरिकी सेना के विमान से उन्हें बेड़ियों से जकड़ कर वापस इंडिया डिपोर्ट कर दिया गया है. रॉबिन के अमेरिका पहुंचने की दास्तान किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं. अमेरिका जाने के लिए रॉबिन को भूखे पेट लात घूंसे खाने पड़े थे. लाखों रुपये खर्च करने के बाद किसी तरह वो डंकी रूट के जरिए अमेरिका पहुंचे थे. रॉबिन हांडा उन्हीं 104 लोगों में शामिल हैं जिनके घरवालों ने अमेरिका जाने की कीमत के रूप में अपनी जमीनें बेची. गहने गिरवी रखे.

कई कष्टों को सहते पहुंचे थे अमेरिका

अमेरिका में दाखिल होना इतना आसान काम नहीं था. उफनती नदियों और भयानक जंगलों को पार कर कई लोग अमेरिका पहुंचे थे. इस दौरान उनसे गन पॉइंट पर वसूली की गई. कहीं-कही उन्हें लात घूंसे भी खाने पड़े थे. तमाम मुश्किलों को पार कर वो किसी तरह डंकी रूट के जरिए अमेरिका पहुंचे थे. लेकिन, अमेरिका में बसने का उनका सपना उस समय सपना बनकर ही रह गया जब अमेरिकी अधिकारियों ने उनके हाथों में हथकड़ी लगाकर देश से निकाल दिया. रॉबिन हांडा के पिता मंजीत सिंह अपने बेटे की इस दर्द भरी दास्तां को बयां करते हुए कहते हैं कि उनका बेटा गुयाना, ब्राजील, पेरू, कोलंबिया, इक्वाडोर और ग्वाटेमाला से होता हुआ अमेरिका पहुंचा था. उन्होंने बताया कि उनका बेटा रॉबिन समुद्र पार करता हुआ और जंगलों से होते हुए कई दिनों तक भूखा रहकर मैक्सिको-अमेरिका सीमा तक पहुंचा था.

पिता ने सुनाई बेटे की आपबीती

रॉबिन के पिता ने बताया कि उनके बेटे ने 12वीं तक पढ़ाई की थी. उसके बाद से ही वो अमेरिका जाकर काम करना चाहता था. अपने सपने को पूरा करने के लिए साल 2024 को अपने पैतृक गांव इस्माइलाबाद से निकला था. कई बाधाओं को पार करता रॉबिन जब अमेरिकी सीमा पर पहुंचा तब तक वह विभिन्न लोगों को 45 लाख रुपये का भुगतान कर चुका था. यहां तक की उसका फोन भी छीन लिया गया था. रॉबिन ने पिता ने यह दावा किया. इसके बाद रॉबिन को मैक्सिको में आव्रजन माफिया को सौंप दिया गया. जहां पर उसे काफी प्रताड़ित किया गया. उससे 20 लाख रुपये वसूले गये.

रॉबिन के पिता ने बताया कि उनके दो बेटे हैं. उनका बड़ा बेटा पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया गया था, जबकि रॉबिन अमेरिका जाने पर अड़ा था. रॉबिन के पिता उस ट्रैवल एजेंट को भी कोस रहे हैं जिसने अमेरिका में बसाने का झूठा वादा किया था. रॉबिन के पिता ने ट्रैवल एजेंट पर धोखा देने का आरोप लगाया है. अमेरिका से डिपोर्ट किए लोगों के अन्य परिजनों का भी आरोप है कि एजेंट ने उन्हें डंकी रूट से होते हुए कई नदियों और जंगलों को पार करके अमेरिकी सीमा तक पहुंचाया था.

अमेरिका ने किया अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट

अमेरिकी सेना का सी-17 ग्लोबमास्टर विमान इन अवैध प्रवासियों को लेकर बुधवार को अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा था. जिनमें हरियाणा पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र और यूपी के कई लोग थे. इसी कड़ी में कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक वरुण सिंगला ने बताया कि चम्मूकलां गांव के रहने वाले खुशप्रीत सिंह ने अमेरिका पहुंचने के लिए 40 लाख रुपये खर्च किए थे. उनके पिता जसवंत सिंह ने अपनी खेती की जमीन गिरवी रखकर पैसे का इंतजाम किया था.

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प्रीतीश सहाय

लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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