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मैं गुजरात के मुख्यमंत्री पद की रेस में नहीं, बोले सीआर पाटील

गुजरात के नवसारी से BJP सांसद सीआर पाटील ने वीडियो जारी कर ये बातें कहीं. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के इस्तीफा देने के बाद संभावित मुख्यमंत्रियों में पाटील का नाम भी शामिल है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
गुजरात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटील
गुजरात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटील
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गांधीनगर: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटील ने कहा है कि वह मुख्यमंत्री पद की रेस में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि विजय रूपाणी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. जाहिर है, उनकी जगह नया मुख्यमंत्री चुना जायेगा. स्वाभाविक रूप से कई नामों की चर्चा चल रही है. संभावित मुख्यममंत्री के रूप में जिन लोगों का नाम सामने आया है, उसमें मेरा भी नाम शामिल है. मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं ऐसे किसी रेस में नहीं हूं.

गुजरात के नवसारी से भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद सीआर पाटील ने शनिवार को एक वीडियो जारी कर ये बातें कहीं. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद दिन भर मीडिया में संभावित मुख्यमंत्रियों के कई नाम बताये गये. इसमें सीआर पाटील का भी नाम शामिल था. दरअसल, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राज्य में विधानसभा चुनाव होने से लगभग सवा साल पहले शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

यह अभी स्पष्ट तक नहीं है कि रूपाणी ने किन कारणों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है, जहां 182 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव अगले साल दिसंबर में होने हैं. कोरोना वायरस महामारी के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में पद छोड़ने वाले रूपाणी (65) चौथे मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने दिसंबर 2017 में दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी.

रविवार को हो सकती है विधायक दल की बैठक

विजय रूपाणी के इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष तथा गुजरात राज्य इकाई के पार्टी प्रभारी भूपेंद्र यादव ने पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात की. पार्टी सूत्रों ने बताया कि रविवार को संभावित विधायक दल की बैठक में रूपाणी के उत्तराधिकारी के नाम पर चर्चा हो सकती है.

रूपाणी बोले- सीआर पाटील से मतभेद नहीं

राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस सवाल पर विजय रूपाणी ने कहा कि पार्टी इस बारे में फैसला करेगी. उन्होंने प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सीआर पाटील के साथ अपने मतभेदों की बात को खारिज कर दिया. रूपाणी जैन समुदाय से आते हैं, जिसकी राज्य में करीब दो प्रतिशत आबादी है. इस तरह की अटकलें हैं कि उनका उत्तराधिकारी पाटीदार समुदाय से हो सकता है.

2016 में आनंदीबेन ने दिया था इस्तीफा

विजय रूपाणी पहली बार 7 अगस्त, 2016 को मुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद यह पद संभाला था. उन्होंने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद दूसरी बार राज्य की बागडोर संभाली. इस साल 7 अगस्त को मुख्यमंत्री के रूप में पांच साल पूरा करने वाले रूपाणी शनिवार को सरदारधाम भवन के उद्घाटन में उपस्थित थे, जिसमें मोदी ने ऑनलाइन शिरकत की.

विजय रूपाणी के इस्तीफे के बाद गुजरात के नये मुख्यमंत्री को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है. इनमें उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल, राज्य के कृषि मंत्री आरसी फल्दू और केंद्रीय मंत्रियों पुरुषोत्तम रुपाला एवं मनसुख मंडाविया के नामों की अटकलें लगायी जा रही हैं. एक पार्टी नेता ने कहा कि यह कहना असंभव होगा कि मुख्यमंत्री किसे बनाया जायेगा, क्योंकि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेंगे.

नितिन पटेल की तरह प्रभावशाली पाटीदार समुदाय से आने वाले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है. कोविड-19 की लहर के बीच भाजपा ने शासन में बदलाव का जो दौर शुरू किया, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल के बाद भी जारी नजर आ रहा है.

भाजपा ने चार मुख्यमंत्री बदले

भाजपा ने हाल में ही लिंगायत समुदाय से आने वाले दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा की जगह कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में एक अन्य लिंगायत नेता बसवराज बोम्मई को नियुक्त किया. उत्तराखंड में उसने दो ठाकुर मुख्यमंत्रियों को एक के बाद एक हटाया और फिर एक अन्य ठाकुर नेता को कुर्सी पर बैठाया. वहीं गुजरात में ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि सियासी रूप से कम महत्वपूर्ण जैन समुदाय से आने वाले रूपाणी की जगह किसी पाटीदार को कमान सौंपी जा सकती है. पाटीदार पश्चिमी राज्य का सबसे बड़ा समुदाय है.

असम में भी देखा गया कि पार्टी ने पांच साल मुख्यमंत्री रहे सर्बानंद सोनोवाल की जगह इस बार विधानसभा चुनाव के बाद हिमंत बिस्व सरमा पर दांव लगाया. हालांकि, इसे सोनोवाल के काम में किसी तरह की कमी के बजाय सरमा को पार्टी की तरफ से दिये गये इनाम के तौर पर देखा गया. सोनोवाल को पार्टी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी है.

Posted By: Mithilesh Jha

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