Committee Report: बंदी के मुहाने पर खड़ी एचईसी, राहत पैकेज भी रहा बेअसर
एचईसी रांची का मुख्य द्वार
अपनी स्थापना के पहले 40 वर्षों में एचईसी सिर्फ तीन वित्त वर्षों 1975-76, 1976-77 और 1988-89 में ही मुनाफा कमाने में सफल रही. इसके बाद सरकार ने कंपनी को संकट से निकालने के लिए कई बार वित्तीय सहायता और पुनरुद्धार पैकेज दिया. वर्ष 2005, 2008, 2013, 2014 और 2017 में कैबिनेट की मंजूरी से एचईसी को ऋण, वित्तीय सहायता और जमीन के मुद्रीकरण जैसे उपाय उपलब्ध कराए गए. लेकिन इन तमाम प्रयासों के बावजूद कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थायी रूप से सुधारने में सफलता नहीं मिली.
Committee Report: देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंपनियों में शामिल हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचइसी) के भविष्य पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. लंबे समय से कमजोर वित्तीय प्रदर्शन, घटते ऑर्डर, उत्पादन में रुकावट और कार्यशील पूंजी के संकट से जूझ रही एचईसी को पुनर्जीवित करने की संभावना लगातार क्षीण होती जा रही है. उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने एचईसी के विषय में भारी उद्योग मंत्रालय से कुछ सवाल पूछे. जवाब में भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से जो बताया गया, उसमें एचईसी को बचाने के लिए आगे क्या किया जायेगा इसका कोई जिक्र नहीं है. बल्कि सरकार की ओर से अब तक किये गये प्रयास को बताया गया है. मंत्रालय की ओर से की गयी कार्रवाई का विवरण है. साथ ही नीति आयोग के सीईओ की अध्यक्षता में 8 फरवरी 2023 को कमेटी ऑफ ग्रुप ऑफिसर्स (सीजीओ) की बैठक में एचईसी को बंद करने का फैसला लिया गया और उसे कैबिनेट की सैद्धांतिक मंजूरी के लिए भेजा गया वह भी दर्ज है.
छह अगस्त को प्रस्तुत भारी उद्योग मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026-27) पर संसदीय स्थायी समिति की 332 वीं रिपोर्ट पर सरकार की प्रतिक्रिया लोकसभा में 334वीं कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन) के रूप में प्रस्तुत की गयी. रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी अपनी स्थापना के पहले 40 वर्षों में वह सिर्फ तीन वित्त वर्षों 1975-76, 1976-77 और 1988-89 में ही मुनाफा कमाने में सफल रही. इसके बाद सरकार ने कंपनी को संकट से निकालने के लिए कई बार वित्तीय सहायता और पुनरुद्धार पैकेज दिया. वर्ष 2005, 2008, 2013, 2014 और 2017 में कैबिनेट की मंजूरी से एचईसी को ऋण, वित्तीय सहायता और जमीन के मुद्रीकरण जैसे उपाय उपलब्ध कराए गए. लेकिन इन तमाम प्रयासों के बावजूद कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थायी रूप से सुधारने में सफलता नहीं मिली. पिछले पांच वर्षों में एचईसी का प्रदर्शन लगातार कमजोर रहा है. कंपनी की ऑर्डर बुकिंग और उत्पादन दोनों में गिरावट आयी है. वित्त वर्ष 2025-26 एचईसी के लिए और चुनौतीपूर्ण रहा.ऑर्डर के निष्पादन में देरी के कारण ग्राहकों ने 200 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ऑर्डर रद्द कर दिए. इससे कंपनी की ऑर्डर बुक पर सीधा असर पड़ा और भविष्य में कारोबार बढ़ाने की उसकी क्षमता पर भी सवाल खड़े हुए.
झारखंड सरकार ने अब तक आवश्यक एनओसी नहीं दी
एचईसी लंबे समय से अपनी अतिरिक्त जमीन का मुद्रीकरण कर आंतरिक संसाधन जुटाने की कोशिश कर रही है. इसी क्रम में कंपनी ने 22 जनवरी 2024 को झारखंड सरकार से लगभग 6 एकड़ जमीन और उससे जुड़े भवन को एनटीपीसी को हस्तांतरित करने के लिए एनओसी( नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) मांगी थी. कंपनी का उद्देश्य इस जमीन के जरिए संसाधन जुटाकर अपनी कार्यशील पूंजी की समस्या को कुछ हद तक दूर करना था. हालांकि, लगातार प्रयासों के बावजूद झारखंड सरकार ने अभी तक आवश्यक एनओसी नहीं दिया है. इससे जमीन के मुद्रीकरण की योजना भी आगे नहीं बढ़ सकी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एचईसी का परिचालन स्तर पर सुधारने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं. इनमें बंद पड़ी उत्पादन सुविधाओं को दोबारा शुरू करने, उत्पादन योजना में सुधार, ग्राहकों के साथ संपर्क बढ़ाना, खर्चों को तर्कसंगत बनाना, लंबे समय से लंबित बकाया वसूलना और आय के नए स्रोत तलाशना शामिल है. कंपनी के प्रबंधन को मजबूत करने के लिए भेल(भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) के सीएमडी को एचइसी के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. सरकार की कोशिश रही कि एचईसी को भेल की प्रबंधन क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और इंजीनियरिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के अनुभव का फायदा मिले. लेकिन मंत्रालय ने कमेटी को यह नहीं बताया है कि भेल के सीएमडी एचइसी के ग्राउंड पर कितने दिनों तक जाकर काम किया.
सरकार की नयी नीति बनी सबसे बड़ी चुनौती
एचईसी के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू केंद्र सरकार की नयी 'पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइजेज पॉलिसी फॉर आत्मनिर्भर भारत' है. इस नीति के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को रणनीतिक और गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में बांटा गया है. रणनीतिक क्षेत्रों में परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष एवं रक्षा, परिवहन एवं दूरसंचार, बिजली, पेट्रोलियम, कोयला एवं अन्य खनिज तथा बैंकिंग, बीमा एवं वित्तीय सेवाएं शामिल हैं. गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में आने वाली सरकारी कंपनियों के मामले में जहां संभव हो वहां निजीकरण और जहां निजीकरण संभव नहीं हो वहां बंदी पर विचार किये जाने की बात कही गयी है. एचइसी इसी नीति के दायरे में आती है और यही वजह है कि कंपनी के भविष्य को लेकर सरकार का रुख महत्वपूर्ण हो गया है. नीति आयोग के सीईओ की अध्यक्षता में 8 फरवरी 2023 को हुई सीजीओ की बैठक में एचईसी को बंद करने की सिफारिश की गई. इसके बाद डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज(डीपीई) ने एचईसी पर बैकग्राउंड नोट मांगा, ताकि कंपनी को बंद करने के लिए सीसीईए(कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स) से इन प्रिंसिपल अप्रूवल लेने के उद्देश्य से कैबिनेट नोट तैयार किया जा सके. भारी उद्योग मंत्रालय ने आवश्यक बैकग्राउंड नोट डीपीई को सौंप दिया है. इसका सीधा सा मतलब है कि एचईसी को बंद करने का मामला महज चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी निर्णय प्रक्रिया में आगे बढ़ चुका है.
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगा कि एचइसी तत्काल बंद होने जा रही है. कमेटी की रिपोर्ट में बंदी की सिफारिश और उसके लिए आगे बढ़ाई गई प्रक्रिया का सिर्फ उल्लेख है. अंतिम निर्णय के लिए संबंधित सरकारी और कैबिनेट स्तर की स्वीकृतियां जरूरी होंगी. समिति ने अपनी 332 वीं रिपोर्ट में सिफारिश की है कि भारी उद्योग मंत्रालय अपने अधीन आने वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रदर्शन में हाल में हुए सुधारों को मजबूत और स्थायी बनाए. इसमें विशेष रूप से एचईसी का उल्लेख है. यानी एचईसी को एक तरफ समिति की ओर से परिचालन स्तर पर सुधारने की जरूरत बतायी जा रही है, वहीं दूसरी ओर उसे बंद करने की सिफारिश सरकारी प्रक्रिया में मौजूद है. यही विरोधाभास कंपनी के भविष्य को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है.
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