Morbi Bridge Collapse: मोरबी हादसे में बड़ा खुलासा, फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना कर दिया गया चालू, केस दर्ज
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 31 Oct 2022 9:44 AM
Morbi Bridge Collapse: मोरबी नगर पालिका के मुख्य अधिकारी संदीपसिंह जाला ने कहा, पुल को 15 साल के लिए संचालन और रखरखाव के लिए ओरेवा कंपनी को दिया गया था. इस साल मार्च में, इसे मरम्मत के लिए जनता के लिए बंद कर दिया गया था.
गुजरात के मोरबी में माच्छू नदी पर बने केबल पुल के टूटने से अबतक 134 लोगों की मौत हो गयी. कई लोगों की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है. हादसे में अबतक 177 लोगों को बचाया गया है.
7 महीने से बंद था पुल, 5 दिन में ही हो गया धराशायी
एक निजी कंपनी द्वारा सात महीने तक पुल का मरम्मत कार्य करने के बाद इसे 5 दिन पहले ही जनता के लिए फिर से खोला गया था. बड़ी बाद है कि पुल को नगरपालिका का फिटनेस प्रमाणपत्र अभी नहीं मिला था और इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया.
#MorbiBridgeCollapse | Indian Army teams deployed in Morbi, Gujarat carried out search and rescue operations for survivors of the mishap. All three defence services have deployed their teams for search operations: Defence officials pic.twitter.com/tfEjCW3MhE
— ANI (@ANI) October 31, 2022
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एक सदी से भी ज्यादा पुराना था पुल
मोरबी शहर में बना हैंगिंग ब्रिज करीब एक सदी से भी ज्यादा पुराना था. हादसे से पहले पुल में करीब 400 से अधिक लोग एक साथ चढ़ गये थे. मोरबी नगर पालिका के मुख्य अधिकारी संदीपसिंह जाला ने कहा, पुल को 15 साल के लिए संचालन और रखरखाव के लिए ओरेवा कंपनी को दिया गया था. इस साल मार्च में, इसे मरम्मत के लिए जनता के लिए बंद कर दिया गया था. 26 अक्टूबर को गुजराती नववर्ष दिवस पर मरम्मत के बाद इसे फिर से खोल दिया गया था. उन्होंने कहा, मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद इसे जनता के लिए खोल दिया गया था. हालांकि स्थानीय नगरपालिका ने अभी तक कोई फिटनेस प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था. हादसे के बाद गुजरात सरकार ने कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया है. कंपनी के खिलाफ धारा 304, 308, और 114 के तहत केस दर्ज किया गया है.
इंजीनियरिंग का चमत्कार था मोरबी पुल
जिला कलेक्ट्रेट की वेबसाइट पर पुल के विवरण के अनुसार, यह एक इंजीनियरिंग चमत्कार था और यह केबल पुल मोरबी के शासकों की प्रगतिशील और वैज्ञानिक प्रकृति को दर्शाने के लिए बनाया गया था. सर वाघजी ठाकोर ने 1922 तक मोरबी पर शासन किया. वह औपनिवेशिक प्रभाव से प्रेरित थे और उन्होंने पुल का निर्माण करने का फैसला किया जो उस समय का कलात्मक और तकनीकी चमत्कार था. इसके अनुसार पुल निर्माण का उद्देश्य दरबारगढ़ पैलेस को नजरबाग पैलेस से जोड़ना था. कलेक्ट्रेट वेबसाइट के अनुसार, पुल 1.25 मीटर चौड़ा था और इसकी लंबाई 233 मीटर थी. इसके अनुसार इस पुल का उद्देश्य यूरोप में उन दिनों उपलब्ध नवीनतम तकनीक का उपयोग करके मोरबी को एक विशिष्ट पहचान देना था.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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