क्‍या मिल गया कोरोना का इलाज ? इन दवाइयों ने COVID19 के खिलाफ जंग में जगा दी जीत की उम्‍मीद

Author : ArbindKumar Mishra Published by : Prabhat Khabar Updated At : 30 Apr 2020 5:11 PM

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Bhopal: Government employees undergo thermal screening before entering Satpura Bhawan, during the ongoing COVID-19 lockdown, in Bhopal, Thursday, April 30, 2020. Madhya Pradesh Government decided to open its offices with only 30 percent of staff every day. (PTI Photo)(PTI30-04-2020_000053A)

कोरोना वायरस (Coronavirus Lockdown) ने इस समय पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है. इस बीमारी से बाहर निकलने के लिए देश-दुनिया में दवाइयों की खोज की जा रही है, लेकिन अब तक बड़ी सफलता नहीं मिल पायी है और यह नहीं कहा जा सकता है कि इस दवाई से कोरोना का इलाज किया जा सकता है. हालांकि इस ओर कई शोध ने और दवाइयों ने उम्‍मीद की नयी किरण जरूर दिखा दी है.

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नयी दिल्‍ली : कोरोना वायरस ने इस समय पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है. इस बीमारी से बाहर निकलने के लिए देश-दुनिया में दवाइयों की खोज की जा रही है, लेकिन अब तक बड़ी सफलता नहीं मिल पायी है और यह नहीं कहा जा सकता है कि इस दवाई से कोरोना का इलाज किया जा सकता है. हालांकि इस ओर कई शोध ने और दवाइयों ने उम्‍मीद की नयी किरण जरूर दिखा दी है.

कोरोना से लड़ाई में अबतक की जिस दवा को सबसे अधिक प्रभावी बतायी जा रही है, उसका नाम Remdesivir है. कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज के लिए एक भारतीय-अमेरिकी चिकित्सक के नेतृत्व में किए गए विषाणु रोधी दवा ‘रेम्डेसिविर’ के तीसरे चरण के चिकित्सकीय परीक्षण के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं.

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कैलीफोर्निया स्थित दवा कंपनी गिलीड साइंसेज ने बुधवार को कहा कि प्रारंभिक परिणामों से पता चला कि ‘रेम्डेसिविर’ दवा की पांच दिन की खुराक के बाद कोविड-19 के मरीजों में से 50 प्रतिशत की हालत में सुधार हुआ और उनमें से आधे से अधिक को दो सप्ताह के भीतर छुट्टी दे दी गई.

तीसरे चरण के परीक्षण को दवा को स्वीकृति मिलने की प्रक्रिया में अंतिम कदम कहा जाता है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में मेडिसिन के क्लिनिकल प्रोफेसर एवं अध्ययन में शामिल अग्रणी अनुसंधानकर्ताओं में से एक अरुणा सुब्रह्मण्यन ने कहा, ये परिणाम उत्साहजनक हैं और संकेत करते हैं कि जिन मरीजों ने ‘रेम्डेसिविर’ दवा का पांच दिन तक सेवन किया, उनकी हालत में 10 दिन तक दवा का सेवन करनेवालों की तरह ही सुधार हुआ.

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इस दवा के अलावा Favipiravir टैबलेट्स को भी कोरोना के इलाज में कारगर बताया जा रहा है. ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स को कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों पर इस दवा का टेस्‍ट करने की अनुमति मिल गई है.फैविपिराविर एक एंटी-वायरल मेडिसिन है. बताया जाता है कि यह दवा इंफ्लूएंजा वायरस के खिलाफ कारगर साबित हुआ है.

भारत में प्‍लाजमा थेरेपी से भी कोरोना के इलाज करने का दावा किया जा रहा है. कई राज्‍यों में इसका परिक्षण जारी भी है, हालांकि स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की ओर से साफ कर दिया गया है कि इसपर अभी शोध जारी है इसलिए यह दावा करना गलत है कि कोरोना का इलाज प्‍लाजमा से ही हो सकता है.

दूसरी ओर अब टीबी की दवा बीसीजी से भी कोरोना के इलाज की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. अमेरिका के हॉफकिन रिसर्च इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक महाराष्ट्र के मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट (एमईडी) के साथ मिलकरक्लिनिकल ट्रायल की तैयारी कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि शुरुआती स्‍तर पर कुछ अच्‍छे परिणाम भी मिले हैं. इसके अलावा भी कई दवाइयों पर अभी शोध कार्य किये जा रहे हैं.

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में अब तक कुल 30 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 2 लाख से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है. कोरोना से लगभग पूरी दिया को अपने चपेट में ले लिया है.

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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