क्या है डेड-ड्रॉप? जिसके जरिए डाक-डिलिवरी बॉय बन रहे ड्रग तस्करों का निशाना, अनजाने पहुंचा रहे नशे का सामान

Updated:
विज्ञापन

गोवा पुलिस ने छापेमारी में स्टीम आयरन के अंदर से ड्रग्स बरामद किया. फोटो- एआई जेनरेटेड.

ड्रग तस्कर अब डाक और डिलीवरी सेवाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं. गोवा पुलिस ने इस नेटवर्क को पकड़ा है, जिसमें डेड ड्रॉप का उपयोग किया जा रहा है. इसमें डिलिवरी बॉय अनजाने ही तस्करों का सामान पहूुंचा रहे हैं.

विज्ञापन

नशे के कारोबारी किसी भी हद तक जा सकते हैं. वे देश के अंदर अपना सामान पहुंचाने के लिए मासूम पोस्ट-कूरियर-डिलिवरी करने वालों को निशाना बना रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गोवा पुलिस ने इस साल की शुरुआत में चरस की एक खेप पकड़ी, लेकिन पुलिस की चिंता सिर्फ नशीले पदार्थ की तस्करी को लेकर नहीं थी. तस्करों ने चरस के पैकेट स्टीम आयरन के निचले हिस्से में छिपाकर उसे एक सामान्य कूरियर पैकेज के जरिए गोवा भेजा था. डिलीवरी करने वाला ड्राइवर इस बात से पूरी तरह अनजान था कि उसके हाथ में नशीला पदार्थ है.

इस घटना के बाद गोवा पुलिस ने कूरियर, पोस्टल और डिलीवरी कंपनियों की मदद से ड्रग तस्करी पर रोक लगाने की रणनीति बनाई है. यह पहल ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत तैयार तीन साल के रोडमैप का हिस्सा है. पुलिस अधिकारियों ने हाल ही में गोवा में काम कर रहे कूरियर और पोस्टल सेवा प्रदाताओं के कम से कम 75 प्रतिनिधियों के साथ जागरूकता बैठक की. 

पार्सल और डाक नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे तस्कर

एंटी-नारकोटिक्स सेल ने उन्हें बताया कि तस्कर छोटे पार्सलों और डाक नेटवर्क का इस्तेमाल खासकर गांजा और चरस छिपाकर भेजने के लिए कर रहे हैं. पुलिस ने कंपनियों को संदिग्ध पार्सलों की पहचान करने के लिए सतर्क रहने को कहा है. इनमें फर्जी नाम से बुक किए गए पार्सल, अधूरी भेजने या पाने वाले की जानकारी, असामान्य पैकेजिंग और घोषित कीमत से मेल न खाने वाले महंगे पार्सल शामिल हैं.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि कूरियर और पोस्टल कंपनियां ड्रग तस्करी रोकने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. उन्होंने केवाईसी नियमों का पालन, भेजने और पाने वाले की जानकारी की पुष्टि और संदिग्ध पार्सलों की तत्काल सूचना पुलिस को देने पर जोर दिया.

‘डेड-ड्रॉप’ तरीके से हो रही तस्करी

एक्सप्रेस रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि तस्करों के बीच ‘डेड-ड्रॉप’ तरीका तेजी से इस्तेमाल हो रहा है. इसमें खरीदार पहले विक्रेता को पैसे भेजता है. इसके बाद उसे किसी खास स्थान के निर्देश या लोकेशन भेजी जाती है, जहां से वह ड्रग्स हासिल करता है.

कई बार नशीले पदार्थ ऐसे कूरियर पार्टनर के जरिए पहुंचाए जाते हैं, जिसे पार्सल के अंदर की सामग्री की कोई जानकारी नहीं होती. पुलिस के अनुसार इस तरीके से तस्करों को अपनी पहचान छिपाने का फायदा मिलता है और डिलीवरी पार्टनर अनजाने में ड्रग्स पहुंचाने का माध्यम बन जाता है.

ये भी पढ़ें:- वाराणसी एयरपोर्ट पर एयर इंडिया के पैसेंजर की बंदूक से चली गोली, दो घायल

गोवा में कौन-सी ड्रग्स कहां से आ रही हैं?

पुलिस के एंटी-नारकोटिक्स विश्लेषण के मुताबिक गोवा में सबसे ज्यादा जब्त होने वाले नशीले पदार्थों में गांजा, चरस, एलएसडी, एमडीएमए/एक्स्टेसी और कोकीन शामिल हैं. कोकीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी होकर दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों के रास्ते गोवा पहुंचती है. गांजा झारखंड और ओडिशा से, जबकि चरस हिमाचल प्रदेश और नेपाल से आती है. एलएसडी केरल से पहुंचती है. मेथामफेटामाइन केरल और बेंगलुरु से, जबकि एमडीएमए/एक्स्टेसी केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली से गोवा लाई जाती है.

2023 के आकलन में बताया गया था कि कोकीन दक्षिण अमेरिकी देशों से समुद्री रास्ते और मुख्य रूप से शिपिंग कंटेनरों के जरिए आती है. एलएसडी पेपर फ्लाइट्स में किताबों के अंदर छिपाकर लाया जाता है, जबकि चरस हिमाचल प्रदेश, उत्तर भारत के अन्य राज्यों और नेपाल से ट्रेन तथा बसों के जरिए पहुंचती है.

तेजी से बढ़े ड्रग मामलों के आंकड़े

रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा पुलिस के अनुसार 2023 में 140 मामले दर्ज हुए और 166 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 21 विदेशी नागरिक थे. 2024 में मामले बढ़कर 162 और गिरफ्तारियां 192 हो गईं. 2025 में 163 मामले दर्ज हुए और 213 गिरफ्तारियां हुईं. 12 अगस्त 2026 तक 122 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और 135 लोग गिरफ्तार हुए हैं.

ड्रग्स तस्करों पर लगाम लगाने में जुटी पुलिस

पुलिस की तीन साल की रणनीति में चार प्रमुख पिलर हैं. पहला-कानून का पालन करवाने के साथ खुफिया अभियान. दूसरा- प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण. तीसरा- मांग व नुकसान में कमी लााना और चौथा- क्षमता निर्माण के साथ अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय करना.

हालांकि, पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती भी है, जिसमें निजी कूरियर सेवाओं की निगरानी के लिए कोई स्पष्ट नियमों वाला फ्रेमवर्क नहीं है. लेकिन पुलिस ने कूरियर कंपनियों को MANAS राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन 1933 की जानकारी दी है. संदिग्ध पार्सल मिलने पर पुलिस को सूचना देने के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप भी बनाया गया है. 

ये भी पढ़ें:- मुंबई: घर में फंदे से लटका मिला नौसेना का नाविक, पत्नी और बच्चों के भी शव मिले


विज्ञापन
अनन्त नारायण शुक्ल

लेखक के बारे में

By अनन्त नारायण शुक्ल

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola