ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान नंबर वन, 2025 में हुईं 1139 मौतें, भारत का नंबर देखें

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Global Terrorism Index

ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स, photo AI

Global Terrorism Index: ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान पहले स्थान पर पहुंच गया है. यह पहली बार है, जब पाकिस्तान आतंकवाद से जुड़ी मौतों के मामले में नंबर वन बना है.

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Global Terrorism Index: पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों के कारण मरने वालों की संख्या में 2025 में 6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) ने वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 2026 का आंकड़ा जारी किया है. जिसके अनुसार पाकिस्तान में पिछले साल में 1139 मौतें दर्ज की गईं थीं.

रिपोर्ट में 163 देशों का किया गया आकलन

इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) ने 163 देशों की स्थिति का आकलन किया है, जिसमें पाया गया कि अपने पड़ोसियों, खास कर अफगानिस्तान के साथ तनावपूर्ण संबंध, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की ओर से बढ़ती हिंसा ने पाकिस्तान की संकट बढ़ा दी है.

भारत कितने नंबर पर मौजूद?

ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में भारत 13वें स्थान पर है. दूसरे स्थान पर बुर्किना फासो, तीसरे नंबर पर नाइजर, चौथे स्थान पर नाइजीरिया और पांचवें नंबर पर माली है.

ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में टॉप 20 देश

पाकिस्तान
बुर्किना फासो
नाइजर
नाइजीरिया
माली
सीरिया
सोमालिया
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य
कोलम्बिया
इजराइल
अफगानिस्तान
कैमरून
भारत
म्यांमार
मोज़ाम्बिक
इराक
रूस
ईरान
बेनिन
थाईलैंड

2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद के कारण हुई 1139 मौतें

2013 के बाद पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है. 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से 1139 मौतें और 1045 घटनाएं दर्ज की गईं. आंकड़ों के अनुसार, 2009 से पाकिस्तान में हुए कुल हमलों में से 67 प्रतिशत से अधिक हमले टीटीपी द्वारा किए गए हैं.

पाकिस्तान में बंधक बनाने की घटना में भी हुआ इजाफा

पाकिस्तान में बंधक बनाने की घटनाओं में भारी उछाल आया है. पीड़ितों की संख्या 2024 में 101 से बढ़कर 2025 में 655 हो गई. यह वृद्धि मुख्य रूप से जाफर एक्सप्रेस हमले के कारण हुई, जिसमें 442 लोगों को बंधक बनाया गया था.

पाकिस्तान में 70 प्रतिशत मौतें आतंकवादी घटनाओं की वजह से होती हैं

पाकिस्तान अब बुर्किना फासो, नाइजीरिया, नाइजर और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के साथ उन पांच देशों में से एक है, जहां 70 प्रतिशत मौतें आतंकवाद की वजह से होती हैं.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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