India China Face off : गलवान घाटी में बिहार रेजिमेंट के जवानों ने जहां से उखाड़ फेंका था टेंट, चीनी सेना ने फिर से बनाया

Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 25 Jun 2020 9:31 AM

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India China Face off, galwan valley : वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर चीन के इरादे ठीक नजर नहीं आ रहे हैं. टीवी रिपोर्ट के अनुसार 15-16 जून की रात बिहार रेजिमेंट (Bihar Regiment ) के जवानों ने पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जिस टेंट को तहस-नहस कर दिया था वहां फिर से उसी तरह का स्‍ट्रक्‍चर खड़ा करने का काम चीन की ओर से किया गया है. गलवान घाटी में पैट्रोल पॉइंट 14 के पास टेंट जैसा स्‍ट्रक्‍चर दिख रहा है. इसकी पुष्टि भारतीय सैनिकों (indian army) की ओर से की गयी है. सैटेलाइट इमेज में भी वह स्‍ट्रक्‍चर वहीं पर नजर आ रहा है.

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India China Face off, galwan valley : वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर चीन के इरादे ठीक नजर नहीं आ रहे हैं. टीवी रिपोर्ट के अनुसार 15-16 जून की रात बिहार रेजिमेंट (Bihar Regiment ) के जवानों ने पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जिस टेंट को तहस-नहस कर दिया था वहां फिर से उसी तरह का स्‍ट्रक्‍चर खड़ा करने का काम चीन की ओर से किया गया है. गलवान घाटी में पैट्रोल पॉइंट 14 के पास टेंट जैसा स्‍ट्रक्‍चर दिख रहा है. इसकी पुष्टि भारतीय सैनिकों (indian army) की ओर से की गयी है. सैटेलाइट इमेज में भी वह स्‍ट्रक्‍चर वहीं पर नजर आ रहा है.

चीन के इस कृत्य से यह साफ हो जाता है कि कमांडर-लेवल पर हुई बातचीत में बनी सहमति का हमारे पड़ोसी देश ने उल्‍लंघन किया है. जानकारों की मानें तो दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है लेकिन चीन के इस कदम से उसके और बढ़ने की संभावना है.

चालबाज चीन बातचीत की आड़ में सीमा पर बना रहा बंकर और दीवार

चीन गलवान घाटी में झड़प की जगह के पास ही बचाव के लिए बंकर बना रहा है. इस जगह पर चीन ने छोटी-छोटी दीवारें और खाई बनायी हैं. ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट ‘डेट्रेस्फा’ ने गलवान घाटी की ताजा सेटेलाइट तस्वीरें जारी कर इस बात का खुलासा किया है. ताजा तस्वीरों से अब चीन की मंशा को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. माना जा रहा है कि चीन बातचीत की आड़ में अपनी सैन्य स्थिति मजबूत कर रहा है.

पैंगॉन्ग-सो झील इलाके पीएलए अभी भी मौजूद

डेट्रेस्फा के मुताबिक, चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) पैंगॉन्ग-सो झील इलाके में अभी भी डेरा जमा रखा है. यही नहीं इसकी मौजूदी छोटे-छोटे समूहों में बढ़ती जा रही है. पैंगॉन्ग-सो के 19 किमी दक्षिण में ज्यादा सपॉर्ट पोजिशन दिख रही है. बता दें कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच बातचीत के बाद बीजिंग ने गलवान से अपनी सेना हटाने को लेकर सहमति जतायी थी.

फिंगर-4 से 8 तक के इलाकों पर चीन का कब्जा

पैंगॉन्ग-सो को लेकर भारत और चीन के बीच स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है. बताया जा रहा है कि चीन यहां से हटने के लिए तैयार नहीं है. चीन ने इस इलाके में कई नये बंकर बना लिये हैं. चीन ने फिंगर-4 से लेकर फिंगर-8 तक आठ किमी के ऊंचाई वाले इलाकों पर कब्‍जा कर लिया है. सूत्रों के मुताबिक, अगर सबकुछ प्‍लान के मुताबिक रहा, तो धीरे-धीरे पैंगॉन्ग-सो को छोड़कर अन्‍य इलाकों से सैनिक हटेंगे. पैंगॉन्ग-सो में अभी चीनी सेना हटने के मूड में नहीं दिखायी दे रही है. इधर, चीन ने झड़प के लिए भारत को जिम्मेदार बताया है.

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लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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