देश में नहीं होगी तेल की किल्लत, अमेरिका से कम और इन देशों से ज्यादा तेल मंगा रहा है भारत
होर्मुज स्ट्रेट (File Photo)
Fuel Crisis : होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अभी भी संशय की स्थिति नजर आ रही है. ईरान ने 20 जून को कहा कि उसने होर्मुज को फिर बंद कर दिया है. इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत पर इसका असर पड़ेगा? क्या देश में तेल की किल्लत होगी? जानें जानकारों ने क्या कहा.
Fuel Crisis : भारत ने जून में रूस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है. विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने और खाड़ी देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने से पहले पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने के लिए इम्पोर्ट बढ़ाया है. समुद्री एवं जिंस आसूचना कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, 19 जून तक भारत ने रूस से औसतन 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) कच्चा तेल इम्पोर्ट किया है, जो मई में 19.1 लाख बीपीडी था. इसके साथ ही रूस, भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है.
जून में यूएई से आयात 6.36 लाख बीपीडी रहा, जो मई के रिकॉर्ड 6.44 लाख बीपीडी के करीब है. वहीं, वेनेजुएला 2.09 लाख बीपीडी के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा. सऊदी अरब से आयात 3.84 लाख बैरल प्रतिदिन रहा. इसके उलट अमेरिका से तेल आयात घटकर 91,000 बीपीडी रह गया, जबकि मई में यह 2.52 लाख बीपीडी था.
तेल के लिए सिर्फ एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता भारत
भारत अब तेल खरीदने में सिर्फ एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता, इसलिए वह अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदने की रणनीति अपना रहा है. रूस से सस्ते दाम पर मिलने वाला तेल अभी भी भारत के लिए फायदे का सौदा है, वहीं यूएई से बढ़ी खरीद ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच आपूर्ति को सुरक्षित रखने में मदद की है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और अपनी तेल, एलएनजी व एलपीजी की जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर रहता है.
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हाल ही में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान द्वारा होर्मुज को बंद करने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी थी. यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है. ऐसे में भारत पहले से तैयारी कर अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने में जुटा है. हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम समझौते के बाद पिछले सप्ताह से तेल टैंकर की आवाजाही फिर शुरू हो गई. इसके बावजूद संघर्षविराम के टिकने को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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