पहले कोरोना और अब भूकंप से दहल रहा दिल्ली-एनसीआर, लगातार दूसरे दिन महसूस किये गये झटके

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देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सोमवार को लगातार दूसरे दिन भूकंप के झटके महसूस किये गये.
नयी दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सोमवार को लगातार दूसरे दिन भूकंप के झटके महसूस किये गये. इसके पहले रविवार को 3.4 रिक्टर स्केल पर भूकंप के झटके महसूस किये गये थे. सोमवार को भी जब एक बार फिर जब धरती हिली ,तो लोग घबरा गये. बताया जा रहा है कि सोमवार को भूकंप 2.7 रिक्टर स्केल पर मापा गया. इस मामूली झटके के कारण दिल्ली के अलावा, नोएडा, गाजियाबाद सहित पूरे एनसीआर में झटके महसूस किये गये.
वहीं, दूसरी ओर सोशल मीडिया पर इस बात ने जोर पकड़ ली है कि पहले कोरोना और अब भूकंप के झटकों से दिल्ली और एनसीआर दहल रहे हैं. सोशल मीडिया पर रविवार से यह भी ट्रेंड कर रहा है, ‘कोरोना बाहर निकलने नहीं देता और भूकंप घर में रहने नहीं देता.’
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इसके पहले रविवार को दिल्ली एनसीआर में शाम 5:50 के करीब भूकंप के झटके महसूस किए गये. दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद और गुड़गांव में भी भूकंप के झटके महसूस किये गये थे. ऐसे में लॉकडाउन के दौरान भी लोग घरों से बाहर निकल आए. जो लोग बाहर नहीं निकले, वे अपनी बालकनी में आ गये. बताया जा रहा है कि इसकी तीव्रता 3.5 रही.
रविवार को भूकंप का केंद्र कहीं और नहीं, बल्कि दिल्ली में ही था और मात्र 8 किलोमीटर नीचे है. मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी दिल्ली में भूकंप का केंद्र था. आम तौर पर भूकंप के दौरान लोग घरों से बाहर आ जाते हैं. एक बार के झटके के बाद दोबारा भूकंप के झटके नहीं महसूस किए गये. ऐसे में घरों में वापस जाया जा सकता है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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