FCRA बिल पर विपक्ष को ऐतराज, आखिर क्यों विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून पर उठ रहे सवाल?
FCRA बिल के विरोध में विपक्ष (फोटो : AI)
FCRA बिल संसद में 12 अगस्त को पेश होने वाला है. विपक्ष ने बिल का विरोध करना शुरू कर दिया है. इसके कानून बनने से NGOs को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सरकार का नियंत्रण आ जाएगा. आइए जाने बिल में कौन से और प्रावधान हैं, जिनके कारण कानून पर सवाल उठ रहे हैं.
FCRA Bill: केंद्र सरकार के प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल, 2026 को लेकर विपक्ष ने विरोध की तैयारी शुरू कर दी है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बिल को रोकने को लेकर विपक्ष सोमवार को फ्लोर लीडर्स की बैठक में फैसला करेगा. वहीं, एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने मौजूदा स्वरूप में बिल वापस लेने या इसे ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) के पास भेजने की मांग की है.
क्या है FCRA संशोधन बिल?
FCRA यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट विदेशी चंदे से जुड़े नियमों को नियंत्रित करता है. प्रस्तावित संशोधन में विदेशी फंड से जुड़ी संस्थाओं का FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म होने, सरेंडर होने या अवधि समाप्त होने की स्थिति में एक 'डेजिग्नेटेड अथॉरिटी' बनाने का प्रस्ताव है.
यह अथॉरिटी संबंधित संस्था को मिले विदेशी फंड और उससे बनाई गई संपत्तियों को अपने कंट्रोल में ले सकेगी. अगर संस्था तय अवधि में दोबारा FCRA रजिस्ट्रेशन हासिल नहीं कर पाती है, तो इन संपत्तियों को आगे भी सरकार के कंट्रोल में रखा जा सकता है.
किन प्रावधानों पर है विवाद?
विपक्ष की मुख्य आपत्ति बिल की धारा 14B, 16A और 16B को लेकर है. धारा 14B FCRA सर्टिफिकेट के खत्म होने की स्थिति से जुड़ी है. धारा 16A के तहत विदेशी फंड और उससे बनाई गई संपत्तियां डेजिग्नेटेड अथॉरिटी के कंट्रोल में जा सकती हैं. वहीं, धारा 16B को लेकर सबसे ज्यादा सवाल हैं, क्योंकि इसके जरिए पहले से मौजूद कुछ संपत्तियों पर भी नए प्रावधान लागू होने की आशंका जताई जा रही है.
विपक्ष को किस बात की चिंता?
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बिल को असंवैधानिक बताते हुए आरोप लगाया कि इससे NGO, कम्युनिटी ऑर्गेनाइजेशन और खासकर माइनॉरिटी कम्युनिटी द्वारा संचालित संस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है. TMC सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने भी इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा और NGO पर एग्जीक्यूटिव कंट्रोल बढ़ने की आशंका जताई.
कांग्रेस ने अपने सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को संसद में मौजूद रहने के लिए व्हिप भी जारी किया है. हालांकि, अगले सप्ताह के संभावित सरकारी कामकाज की सूची में फिलहाल FCRA संशोधन बिल का स्पष्ट उल्लेख नहीं है.
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By आलोक पाठक
आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।
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