नेकां चीफ फारूख अब्दुल्ला को उम्मीद, रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने में जरूर कामयाब होंगे पीएम मोदी

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :21 Nov 2022 5:50 PM (IST)
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नेकां चीफ फारूख अब्दुल्ला को उम्मीद, रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने में जरूर कामयाब होंगे पीएम मोदी

24 फरवरी 2022 को शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध में दोनों पक्षों की ओर से हजारों लोगों की जान जाने का दावा किया जा रहा है. इसके साथ ही, इसकी शुरुआत से ही दोनों देशों से अपील की जा रही है आज के युग में युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है.

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जम्मू : नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) प्रमुख फारूख अब्दुल्ला को इस बात की उम्मीद है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने में अहम भूमिका निभाने के साथ-साथ कामयाबी जरूर हासिल करेंगे. मीडिया से बातचीत करते हुए नेकां प्रमुख फारूख अब्दुल्ला ने सोमवार को उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब नौ महीने से चले आ रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में सफल होंगे. नेकां प्रमुख ने कहा कि युद्ध ने वैश्विक आर्थिक स्थिति पर कहर बरपाया हुआ है. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि भारत को जी-20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता मिली है. यह हो सकता है कि भारत पर इन सभी देशों पर भारी पड़े और मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में सफल होंगे.

अब युद्ध का नहीं है समय : पीएम मोदी

बता दें कि 24 फरवरी 2022 को शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध में दोनों पक्षों की ओर से हजारों लोगों की जान जाने का दावा किया जा रहा है. इसके साथ ही, इसकी शुरुआत से ही दोनों देशों से अपील की जा रही है आज के युग में युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है. खासकर भारत ने दोनों देशों से आपसी बातचीत और कूटनीति के जरिए समस्या का हल निकालने की अपील की है. यहां तक कि उसने वैश्विक संस्था संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी तटस्थता की नीति अख्तियार करते हुए दोनों देशों से संयम बरतते हुए आपसी बातचीत की अपील की. इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल सितंबर में समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के मौके पर एक द्विपक्षीय बैठक में पुतिन को दिए अपने बयान में रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा था कि अब युद्ध का समय नहीं है.

शांति और स्थिरता के लिए बहुपक्षीय प्रणाली जरूरी

उधर, जी 20 समूह के देशों की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि शांति और स्थिरता की रक्षा करने वाले अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय प्रणाली को बनाए रखना आवश्यक है. इसमें संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में निहित सभी उद्देश्यों और सिद्धांतों का बचाव करना और सुरक्षा सहित अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना शामिल है. सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों और बुनियादी ढांचे का सबसे अधिक नुकसान होता है. परमाणु हथियारों के उपयोग या उपयोग की धमकी अस्वीकार्य है. संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान, संकटों को दूर करने के प्रयास, साथ ही कूटनीति और संवाद महत्वपूर्ण हैं. आज का युग युद्ध का नहीं होना चाहिए.

फारूख अब्दुल्ला ने अमित शाह पर किया कटाक्ष

नेकां प्रमुख फारूख अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में अपनी रैली के दौरान ‘पाकिस्तान के बजाय कश्मीरी युवाओं से बात करेंगे’ की टिप्पणी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कटाक्ष किया और कहा कि भारत की पाकिस्तान के साथ लड़ाई है और हमें पड़ोसी मुल्क से बात करनी होगी. दूसरी बात यह है कि हमारे अपने पड़ोसी से जो समस्याएं हैं. हो सकता है कि देश उसका समाधान निकाल लें.

भारत की लड़ाई पाकिस्तान के खिलाफ

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अभी हाल ही में कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर के युवाओं से बात करेंगे, पाकिस्तान से नहीं. उन्होंने कहा कि भारत की असली लड़ाई पाकिस्तान के खिलाफ है, जम्मू-कश्मीर के बच्चों के नहीं. वहीं, फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि मैं उन्हें पाकिस्तान के साथ बातचीत करने के लिए कहते-कहते थक गया हूं. भारत को किसी समय पाकिस्तान से बात करनी चाहिए. अब्दुल्ला ने कहा कि कट्टरपंथ जैसा कुछ नहीं है.

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केंद्र और निर्वाचन आयोग पर निर्भर है विधानसभा चुनाव

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले चुनावों के बारे में बात करते हुए कहा कि चुनाव कराना निर्वाचन आयोग और केंद्र पर निर्भर है. उन्होंने कहा कि जहां तक ​​चुनावों का सवाल है, तो हम नहीं जानते कि वे कब कराए जाएंगे. यह मेरा कर्तव्य है कि मैं आकर लोगों से बात करूं और संसद और केंद्र के सामने उनकी स्थिति को सामने रखूं. यह केंद्र पर निर्भर है. चुनाव आयोग और भारत सरकार को चुनाव कब कराने हैं.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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