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किसान आंदोलन के बीच बीजेपी का लेफ्ट पर अटैक, पात्रा बोले - 'वामपंथी गुंडे' केरल में कर रहे अत्याचार

Updated at : 23 Dec 2020 5:39 PM (IST)
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किसान आंदोलन के बीच बीजेपी का लेफ्ट पर अटैक, पात्रा बोले - 'वामपंथी गुंडे' केरल में कर रहे अत्याचार

दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों पर पिछले 28 दिनों से केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन (farmers protest) जारी है. इधर सरकार ने विपक्ष और केरल सरकार पर बड़ा हमला बोला है. भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा (Sambit Patra ) ने कहा, लेफ्ट के गुंडे केरल (Kerala) में अत्याचार कर रहे हैं.

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दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों पर पिछले 28 दिनों से केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन (farmers protest) जारी है. इधर सरकार ने विपक्ष और केरल सरकार पर बड़ा हमला बोला है. भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा (Sambit Patra ) ने कहा, लेफ्ट के गुंडे केरल (Kerala) में अत्याचार कर रहे हैं.

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, कृषि कानूनों पर केरल सरकार दोहरी निति अपना रही है. केरल के मुख्यमंत्री पीनराई विजयन इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की कोशिश कर रहे थे. मगर उनको बताना चाहिए कि आखिर क्यों केरल में APMC का कानून नहीं है. आप लेफ्ट पूरे हिंदुस्तान में APMC कानून को लेकर भ्रमजाल फैला रहे हैं.

भाजपा नेता संबित पात्रा ने कहा, 1993 से 2018 तक 25 वर्षों तक त्रिपुरा में वामपंथ की सरकार रही. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि त्रिपुरा में इन 25 वर्षों तक कोई भी MSP नहीं था. 25 वर्षों तक वामपंथ के अंतर्गत त्रिपुरा एकमात्र ऐसा राज्य था जहां पर MSP लागू नहीं होती थी.

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उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी जी की सरकार और स्वयं मोदी जी जो हिंदुस्तान के मुख्य सेवक हैं, वे किसानों को अन्नदाता और भगवान मानते हैं. हमने देखा कि आज बहुत से किसान संगठन तीन बिलों के समर्थन में उतरे हैं, कृषि मंत्री से उन्होंने मुलाकात भी की और मोदी जी को धन्यवाद दिया है.

गौरतलब है कि दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसान पिछले 28 दिनों से जमे हुए हैं. सरकार के साथ किसान संगठनों की कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया. सरकार ने साफ कर दिया है कि वो किसानों से बातचीत के लिए हमेशा तैयार है. हालांकि कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि कृषि कानूनों को किसी भी हाल में वापस नहीं लिया जाएगा. लेकिन संशोधन के लिए सरकार तैयार हो गयी है. वहीं किसान कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए अलावा किसी बात पर राजी नहीं हो रहे हैं.

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