Explainer: जानिए कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति ने क्यों कहा, हमें छोड़नी होगी कश्मीर घाटी

Explainer: कश्मीर के शोपियां में मंगलवार को एक कश्मीरी हिंदू की हत्या के बाद कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (KPSS) ने घाटी में रहने वाले सभी कश्मीरी हिंदुओं से पलायन कर किसी और जगह चले जाने का आग्रह किया है.
Explainer: कश्मीर के शोपियां में मंगलवार को एक कश्मीरी हिंदू की हत्या के बाद कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (Kashmiri Pandit Sangharsh Samiti) ने घाटी में रहने वाले सभी कश्मीरी हिंदुओं से पलायन कर किसी और जगह चले जाने का आग्रह किया है. केपीएसएस के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने एक बयान जारी कर कहा कि घाटी में एक और कश्मीरी हिंदू पर हमले से साबित हो गया है कि कश्मीर में रहने वाले प्रत्येक कश्मीरी पंडित को आतंकी कत्ल करने पर तुले हैं. ऐसे में पंडितों को कश्मीर घाटी छोड़कर कहीं और जाने पर विचार करना चाहिए, नहीं तो आतंकी हम सभी को मार डालेंगे.
बता दें कि केपीएसएस उन कश्मीरी हिंदुओं का संगठन है, जिन्होंने कश्मीर में आतंकी हिंसा के चरमोत्कर्ष के दौरान भी कश्मीर से पलायन नहीं किया था. हाल के दिनों में कश्मीरी पंडितों पर लगातार हो रहे हमलों से लोगों में जमकर गुस्सा है. केपीएसएस के प्रमुख संजय टिक्कू ने कहा कि कश्मीर में कश्मीरी पंडित पर आतंकवादियों द्वारा किए गए एक और हमले के जरिए आतंकवादियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे कश्मीर घाटी के सभी कश्मीरी पंडितों की हत्या कर देंगे. कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (केपीएसएस) के अध्यक्ष संजय टिकू ने बीते वर्ष कहा था कि करीब 500 या इससे अधिक लोगों ने बडगाम, अनंतनाग और पुलवामा जैसे इलाकों को छोड़कर जाना शुरू कर दिया है. कुछ गैर कश्मीरी पंडित परिवार भी चले गए हैं. जो 1990 का दोहराव है.
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के प्रमुख संजय टिक्कू उन कश्मीरी पंडितों में से एक हैं जो अब भी कश्मीर में ही रहते हैं. अब वो गैर-विस्थापित कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व करते हैं. डाउनटाउन के हब्बा कदल इलाके में बर्बर शाह मोहल्ले में रहने वाले संजय टिक्कू कहते हैं अलग-अलग सरकारों ने उन कश्मीरी पंडितों की चिंता खूब की जो यहां से चले गए, लेकिन जो यहां रह रहे हैं उनके बारे में कोई नहीं सोचता. संजय टिक्कू का कहना है कि जब मनमोहन सिंह ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के राहत और पुनर्वास का ऐलान किया था तो कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति ने गैर-विस्थापित पंडितों को भी हिस्सेदारी देने की मांग की थी. संजय टिक्कू के अनुसार 1990 में पलायन के बाद भी करीब 800 परिवार कश्मीर में ही रहे. 1996 से 2021 के बीच 581 अल्पसंख्यकों की हत्या की गयी.
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