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लद्दाख के बाद जम्‍मू-कश्‍मीर में भी महसूस किये गये भूकंप के झटके

By Prabhat khabar Digital
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लद्दाख में 4.5 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गये
लद्दाख में 4.5 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गये
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नयी दिल्‍ली : भारत-चीन तनातनी के बीच लद्दाख में 4.5 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गये. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप का केंद्र करगिल से 119 किलोमीटर उत्तर पश्चिम दूर था. भूकंप के झटके 1 बजकर 11 मिनट में महसूस किये गये. इधर लद्दाख के बाद अब जम्‍मू-कश्‍मीर में भी 3.5 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गये.

भूकंप के झटके महसूस किये जाने के बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आये. फिलहाल भूकंप से नुकसान की कोई खबर नहीं है. लद्दाख में इससे पहले भी भूकंप के झटके महसूस किये गये थे.

कश्‍मीर में अब तक 6 बार आ चुका है भूकंप

गौरतलब है कि कुछ दिनों से देश में अलग-अलग जगहों पर कई बार भूकंप के झटके महसूस किये गये हैं. जम्‍मू-कश्‍मीर में थोड़े-थोड़े दिनों के अंतराल में अब तक 6 बार भूकंप के झटके महसूस किये जा चुके हैं. जम्‍मू के कटरा में भी मंगलवार को 4.0 तीव्रता के भूकंप महसूस किये गये.

दिल्‍ली एनसीआर में 15 से भी अधिक बार आ चूका है भूकंप

मालूम हो कोरोना संक्रमण से बुरी तरह से प्रभावित दिल्‍ली में अब तक थोड़े-थोड़े दिनों के अंतराल में 15 से भी अधिक बार भूकंप आ चुके हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय के आसपास धरती के नीचे काफी उथल-पुथल हो रही है, इस कारण भूकंप आ रहे हैं. वैज्ञानिकों ने बड़े भूकंप की चेतावनी भी जारी की है.

दिल्ली में भूकंप के झटकों पर निगरानी

शहर में आवासीय कल्याण संगठनों के शीर्ष निकाय ‘ऊर्जा' ने बुधवार को उप राज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर राष्ट्रीय राजधानी में ढांचागत सुरक्षा नियमों के क्रियान्वयन पर निगरानी में मदद की पेशकश की है.

यूनाइटेड रेजीडेंट्स ज्वाइंट एक्शन (ऊर्जा) ने पिछले दो महीने में शहर में कम तीव्रता के अनेक भूकंप के झटकों के मद्देनजर पत्र लिखा है. संस्था ने दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भी अगुवाई कर रहे उप राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा, ऊर्जा ढांचागत सुरक्षा नियमों के क्रियान्वयन पर निगरानी में मदद के लिए पेशेवर इंजीनियरों, आर्किटेक्ट और शहर नियोजकों को शामिल करके अपनी सेवाएं देने को तैयार है.

ऊर्जा के अध्यक्ष अतुल गोयल ने कहा कि दिल्ली भूकंप संवेदी क्षेत्र -4 में आता है जो बहुत जोखिम वाला क्षेत्र है. गोयल ने कहा, दिल्ली की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी कम विकसित कॉलोनियों, जे जे क्लस्टरों और झुग्गी बस्तियों में रहती है. चांदनी चौक, सदर बाजार, शाहदरा, नजफगढ़, महरौली जैसे पुराने इलाके भी भूकंप के लिहाज से संवेदनशील हैं.

posted by - arbind kumar mishra

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