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60 हजार करोड़ का कृषि ऋण माफ करने वाले पीएम डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुए थे ये 5 बड़े फैसले

Updated at : 26 Dec 2024 11:09 PM (IST)
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Dr Manmohan Singh News: एक झटके में किसानों के 60 हजार करोड़ रुपए कृषि ऋण माफ करने वाले प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल में और भी कई बड़े फैसले हुए थे.

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Dr Manmohan Singh News|डॉ मनमोहन सिंह को भारत की अर्थव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने वाले वित्त मंत्री के रूप में जाना जाता है. उन्होंने पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री के रूप में आर्थिक सुधारों की शुरुआत की. बाद में डॉ मनमोहन सिंह 10 साल तक देश के प्रधानमंत्री रहे. उनके कार्यकाल में यूपीए सरकार ने कई अहम फैसले किए, जिसने देश की दशा और दिशा बदल दी. ऐसी ही योजनाओं में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा), सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई), आधार की सुविधा, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और कृषि ऋण माफी शामिल हैं.

कृषि ऋण माफी

कृषि संकट चरम पर था. कर्ज में डूबे देश के किसान आत्महत्या कर रहे थे. ऐसे समय में डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने कर्ज में डूबे किसानों को राहत देने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया. यूपीए की सरकार ने 60,000 करोड़ की कृषि ऋण माफी का ऐलान किया. वर्ष 2008 में कृषि ऋण माफी से देश के लाखों किसान लाभान्वित हुए.

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अधिनियम

डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने वर्ष 2005 में एक ऐतिहासिक फैसला किया. ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले हर परिवार को 100 दिन के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अधिनियम (नरेगा) लेकर आए. इससे लाखों लोगों को रोजगार मिला. ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में भी सुधार आया.

आधार की सुविधा

सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए आज जिस दस्तावेज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसका नाम है – ‘आधार’. इस आधार की शुरुआत डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने की थी. इसकी शुरुआत देश के हर नागरिक को विशिष्ट पहचान देने के लिए और विभिन्न सेवाओं तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने के लिए की गई थी.

प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण

सरकारें आज लोगों को सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के पैसे सीधे उनके खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) ट्रांसफर करती है. इस डीबीटी की शुरुआत भी डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ही हुआ था. उनकी इस पहल ने सरकारी योजनाओं में लीकेज रोकने में बड़ी भूमिका निभाई.

सूचना का अधिकार अधिनियम

वर्ष 2005 में डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने नागरिकों को सरकारी संस्थानों से जानकारी मांगने का अधिकार दिया था. सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) से शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिला.

92 साल की उम्र में डॉ मनमोहन सिंह ने ली अंतिम सांस

देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने गुरुवार की रात 92 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली. उनके निधन से देश में शोक की लहर दौड़ गई. प्रख्यात अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री के निधन की जानकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर दी. आज ही देर शाम तबीयत बिगड़ने पर उनको एम्स में भर्ती कराया गया था.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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