डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने पांच साल तक यूपी में पर्दे के पीछे से भाजपा को किया मजबूत, अब झारखंड की बारी

Updated at : 10 Sep 2022 12:36 AM (IST)
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लक्ष्मीकांत वाजपेयी

लक्ष्मीकांत वाजपेयी

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर विधानसभा से चार बार के विधायक डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी यूपी में वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार आने के बाद से 2022 तक साइड लाइन थे, मगर वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी. उन्होंने पर्दे के पीछ रहकर अहम किरदार निभाया.

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रांची/नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को एक अहम फैसले के तहत देश के कई प्रदेश प्रभारियों के पद में अहम बदलाव किया है. इस प्रक्रिया तहत पार्टी नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा क्षेत्र से चार बार के विधायक डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी को झारखंड भाजपा इकाई का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है.

सबसे बड़ी बात यह है कि जिस डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी को झारखंड भाजपा का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है, वे वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद योगी आदित्यनाथ के बाद पार्टी की आंतरिक राजनीति में हाशिए पर भेज दिए गए थे. बावजूद इसके उन्होंने 2017 से लेकर 2022 तक पूरे पांच साल डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने उपेक्षित किए जाने के बावजूद पूरे पांच साल तक पर्दे के पीछे से उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने का ही काम किया है.

अब जबकि उन्हें झारखंड में प्रदेश भाजपा का प्रभारी नियुक्त किया गया है, तब राजनीतिक हलकों में यह कहा जा रहा है कि जिस तरह उन्होंने उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूत किया है, उसी तरह वे झारखंड में भी भाजपा के किला को मजबूत करेंगे.

प्रभात खबर के संवाददाता मुहम्मद साजिद की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर विधानसभा से चार बार के विधायक डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी यूपी में वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार आने के बाद से 2022 तक साइड लाइन थे, मगर वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी. उन्होंने पर्दे के पीछ रहकर अहम किरदार निभाया. पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू अर्पणा बिष्ट यादव, उनके समधी हरिओम यादव,पूर्व सांसद सर्वराज सिंह के पुत्र सिद्धराज सिंह समेत प्रमुख नेताओं की भाजपा में ज्वाइनिंग कराई. भाजपा की प्रचंड जीत में अहम किरदार थे. यूपी में दोबारा सरकार आने के बाद डॉ लक्ष्मीकांत वाजेपयी को उनकी वफादारी का इनाम मिल गया है. 29 मई को राज्यसभा में भेजा गया था.मगर, शुक्रवार को झारखंड प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया गया है. यहां अगले वर्ष चुनाव है.

यूपी में दिलाई 73 लोकसभा सीट

डॉ लक्ष्मीकांत बाजपेई अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं. वह मेरठ के स्कूटर से घूमते हैं. 2014 के लोकसभा के चुनाव के दौरान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे. उनकी अगुवाई में बीजेपी ने यूपी में शाानदार सफलता हासिल की थी. भाजपा को 73 लोकसभा सीट मिली थी.

14 वर्ष की उम्र में संघ से जुड़ गए थे

डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी 14 साल की उम्र में जनसंघ से जुड़ गए थे. उन्हें 1977 में जनता पार्टी के युवा विंग का अध्‍यक्ष बनाया गया था. 1980 में भाजपा मेरठ के जनरल सेक्रेटरी बने. इसके साथ ही लक्ष्मीकांत वाजपेयी उत्तर प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष भी बने. 1989 में वह मेरठ की शहर सीट से पहली बार विधायक चुने गए. 1991 का चुनाव दंगा होने के चलते काउंट नहीं हुआ. 1993 में वे चुनाव हार गए थे. इसके बाद 1996 में दूसरी बार एमएलए बने. 2002 में फिर एमएलए बने और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे, लेकिन 2007 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2012 में वह फिर एमएलए बनें और दिसंबर 2012 में बीजेपी ने उन्हें यूपी का अध्यक्ष बनाया. इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा में उनके हाथ फिर से निराशा हाथ लगी. वहीं हाल भी यूपी विधानभा चुनाव में भाजपा की ज्वाइनिंग कमेटी का अध्यक्ष के तौर पर जीत में अहम भूमिका रही.

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लक्ष्मीकांत वाजपेयी का जीवन परिचय

नाम : डॉ लक्ष्मीकांत बाजपेयी

जन्म : 20 जुलाई, 1951, मेरठ

पिता : स्वर्गीय श्याम सुंदर बाजपेयी

जन्म स्थान-मेरठ (स्वामीपाड़ा)

वर्तमान निवास-मोहनपुरी, मेरठ

पत्नी : डा. मधु बाजपेयी, पूर्व प्रवक्ता, मेरठ कालेज

संतान : तीन पुत्रियां-नम्रता, निवेदिता एवं निहारिका, एक पुत्र-पूर्णेंदु बाजपेई

शिक्षा : बीएससी, बीएएमएस, कानपुर

वर्तमान पद: विस चुनाव 2022 में स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन

रुचि : राजनीतिक किताबों एवं समकालीन साहित्य का अध्ययन, जनसेवा

राजनीतिक यात्रा

964 में संघ सेवक. 1977 में बीजेपी युवा मोर्चा, 82 में जिला महामंत्री, 89 में पहली बार विधायक.भाजपा- बसपा की मायावती सरकार में 11 माह 9 दिन तक पशुधन दुग्ध विकासमंत्री.

रिपोर्ट : मुहम्मद साजिद

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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