‘नेबरहुड फर्स्ट’ या बांग्लादेश को सख्त संदेश? जानिए दिनेश त्रिवेदी को राजदूत रहते हुए क्यों मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा
बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी और गोल घेरे में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी , फोटो एक्स
Dinesh Trivedi Cabinet Rank: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा दिया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री त्रिवेदी को 27 अप्रैल को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था. मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब किसी राजनीतिक नेता को विदेशी जमीन पर भारत का दूत बनाकर भेजा गया है. मोदी सरकार के इस फैसले के पीछे की असली वजह क्या है ? बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी ने इंडियन एक्सप्रेस से इस बारे में विस्तार से बात की है.
Dinesh Trivedi Cabinet Rank: पीएम मोदी के कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी दूत को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है. जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के दौरान विजया लक्ष्मी पंडित, टीएन कौल (मॉस्को), डॉ कर्ण सिंह (अमेरिका) और डीपी धर (मॉस्को) को यह सम्मान मिल चुका है.
वीना सीकरी के अनुसार, इस कैबिनेट रैंक के दो मुख्य उद्देश्य हैं
बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा- दिनेश त्रिवेदी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा संपर्क कर सकेंगे. दिनेश त्रिवेदी को विदेश सचिव या विदेश मंत्री के पदानुक्रम (hierarchy) से गुजरने की जरूरत नहीं होगी. कैबिनेट सदस्य के रूप में उनकी पहुंच सीधे प्रधानमंत्री तक होगी. इसके अलावा इस फैसले से ढाका को एक स्पष्ट संकेत मिला है कि त्रिवेदी को प्रधानमंत्री मोदी का बेहद खास राजनीतिक विश्वास हासिल है. वे वहां सीधे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री या शीर्ष कैबिनेट मंत्रियों से ही संवाद करेंगे.
प्रोटोकॉल और सुरक्षा में क्या बदलेगा?
सीकरी ने बताया कि कैबिनेट रैंक के चलते दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में एक सामान्य राजदूत से इतर विशेष कूटनीतिक प्रोटोकॉल मिलेगा. हवाई अड्डे पर आगमन से लेकर देश के भीतर यात्रा करने तक, उन्हें वही सुरक्षा, देखभाल और दर्जा दिया जाएगा जो बांग्लादेश अपने खुद के कैबिनेट मंत्रियों को देता है.
‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को धार और बांग्लादेश को कड़ा संदेश
दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति पीएम मोदी की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता को दर्शाती है. अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं. मोहम्मद यूनुस के 18 महीने के अंतरिम शासन के दौरान कई भारत-समर्थक प्रोजेक्ट्स और नीतिगत फैसलों को पलट दिया गया था, जिससे कड़वाहट बढ़ी थी. अब बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के आने के बाद, भारत व्यापार, निवेश और विकास परियोजनाओं को पुराने ढर्रे पर वापस लाना चाहता है. हालांकि, रहमान की हालिया चीन यात्रा और वहां जारी संयुक्त बयान ने नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
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By अरबिंद कुमार मिश्रा
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करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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