लखनऊ में गूंजा राजस्थान का नाम: अग्निकांड पीड़ितों को मारवाड़ के इस लाल ने दिया 'ठंडा आशियाना'

Published by :Pritish Sahay
Published at :24 Apr 2026 4:11 PM (IST)
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True Hope Foundation

अग्निकांड पीड़ितों को मारवाड़ के धवल दर्जी ने दिया आशियाना

True Hope Foundation: राजस्थान के धवल दर्जी और उनकी संस्था ट्रू होप फाउंडेशन (True Hope Foundation) ने लखनऊ अग्निकांड के बाद 100 हीट-रेसिस्टेंट शेल्टर्स बनाकर कई बेघर परिवारों को राहत दी है.

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True Hope Foundation: राजस्थान की माटी की यह तासीर रही है कि यहां के सपूतों ने न केवल युद्ध के मैदान में, बल्कि इंसानियत की जंग में भी हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है. इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जोधपुर (मारवाड़) के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ धवल दर्जी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वह मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा आज पूरे देश के मीडिया जगत में हो रही है. लखनऊ के विकास नगर में हुए उस खौफनाक अग्निकांड ने जब सैकड़ों परिवारों को सड़क पर ला दिया, तब मारवाड़ का यह बेटा अपनी टीम के साथ राज्यों की सीमा लांघकर सीधे ग्राउंड जीरो पर जा पहुंचा.

पन्नियों की ‘भट्टी’ के बीच मारवाड़ का ‘ठंडा आशियाना’

लखनऊ की 40 डिग्री की चिलचिलाती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच, प्रशासन राहत के नाम पर प्लास्टिक की पन्नियां बांटकर खानापूर्ति कर रही थी. लेकिन जोधपुर की तपती रेत में पले-बढ़े धवल दर्जी जानते थे कि ये पन्नियां राहत नहीं, बल्कि बेसहारा लोगों के लिए ‘जिंदा भट्टी’ हैं. धवल दर्जी और उनकी संस्था ‘ट्रू होप फाउंडेशन’ (True Hope Foundation) ने यहां पारंपरिक ढर्रे को ठुकराते हुए 100 ‘हीट-रेसिस्टेंट’ (ताप-रोधी) शेल्टर्स रातों-रात खड़े कर दिए. यह केवल मदद नहीं थी, बल्कि जोधपुर का वह ‘स्मार्ट मॉडल’ था जिसने लखनऊ के बेघरों को लू और गर्मी से फौलादी सुरक्षा दी.

क्यों खास है यह ‘जोधपुर मॉडल’?

मरुधरा की तकनीक: जोधपुर के धवल ने जिन 10×20 फीट के शेल्टर्स का निर्माण किया, वे सूरज की किरणों को रिफ्लेक्ट कर देते हैं. अंदर का तापमान बाहर की तुलना में 5 से 8 डिग्री तक कम रहता है.

डिजास्टर हीरो का एक्शन: हाल ही में ‘डिजास्टर मैनेजमेंट हीरो अवार्ड’ से नवाजे गए धवल दर्जी ने यह साबित कर दिया कि मारवाड़ का ज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि आपदा के समय जान बचाने के काम आता है.

इंसानियत का ‘सेतु’: जब लखनऊ की बस्तियों में धमाके हो रहे थे और 10 किमी दूर से धुएं का गुबार दिख रहा था, तब राजस्थान की संवेदनाओं ने वहां पहुँचकर सिसकियों को मुस्कुराहट में बदल दिया.

बस्ती के लोगों ने कहा- राजस्थान से आया फरिश्ता

विकास नगर की उस जलती हुई बस्ती में आज जोधपुर के इन युवाओं की बदौलत ‘उम्मीद की सफेद चादर’ बिछी हुई है. स्थानीय बुजुर्गों और महिलाओं की आंखों में धवल दर्जी के लिए जो दुआएं हैं, वह राजस्थान के हर नागरिक के लिए गौरव का विषय है.

धवल दर्जी का कहना है: “जब हम जोधपुर की गर्मी को हरा सकते हैं, तो लखनऊ के बेघरों को क्यों नहीं बचा सकते? हमारा मकसद सिर्फ राहत सामग्री बांटना नहीं, बल्कि राजस्थान की उस संस्कृति को निभाना था जो कहती है कि ‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’.”

यह खबर केवल एक एनजीओ के काम की नहीं है, बल्कि यह उस ‘राजस्थानी स्वाभिमान’ की है जो मुसीबत के समय घर में नहीं बैठता. लखनऊ का यह अग्निकांड इतिहास में जहाँ अपनी भयावहता के लिए याद रखा जाएगा, वहीं जोधपुर के इस ‘जांबाज’ धवल दर्जी के फौलादी इरादों और वैज्ञानिक सोच के लिए भी याद किया जाएगा. शाबाश मारवाड़! शाबाश धवल! लखनऊ की उन बस्तियों से आ रही दुआएं आज राजस्थान की हवाओं में महक रही हैं.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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