Coronavirus का टीका बनाने के लिए तीन कंपनियों को धन मुहैया कराएगा डीबीटी

कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए देश में विकसित किये जा रहे टीके के लिए तीन कंपनियों को डीबीटी धन मुहैया कराएगा.
नयी दिल्ली : कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए देश में विकसित किये जा रहे टीके के लिए तीन कंपनियों को डीबीटी धन मुहैया कराएगा. इसके लिए सोमवार को मंजूरी दे दी गयी है. सरकारी समाचार एजेंसी भाषा की खबर के अनुसार, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने तीन कंपनियों को चुना है, जिन्हें कोविड-19 का टीका विकसित करने के लिए धन मुहैया कराया जाएगा. इसके अलावा, उसे जांच और इलाज के तरीके निकालने के 13 अन्य प्रस्ताव भी मिले हैं.
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डीबीटी ने एक बयान में कहा कि इस तरह की मदद से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अलग-अलग मंच पर टीका बनाने वाली कंपनियां मिल कर तेली से काम पूरा कर सकें. वे इस काम में हो सकता है कि अलग-अलग चरणों में हों. यह मदद राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के तहत की जा रही है. यह मिशन 2017 में टीकों और दवाओं के विकास में कंपनियों के समूह को मदद के लिए शुरू किया गया है. डीबीटी और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग शोध सहायता परिषद ने कोविड-19 पर शोध के लिए आवेदन मंगाए थे.
डीबीटी ने एक बयान में कहा कि पहले चरण के तहत शिक्षा संस्थानों और उद्योगों से लगभग 500 आवेदन मिले. बयान के मुताबिक, इन आवेदनों की बहुस्तरीय समीक्षा जारी है और अब तक धन सहायता मुहैया कराने के लिए 16 प्रस्तावों की सिफारिश की गयी है.
बयान के मुताबिक, जिन प्रस्तावों को वित्त पोषण के लिए मंजूरी दी गयी है, उनमें कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड, भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसआईआईपीएल) के प्रस्ताव शामिल हैं. कोविड-19 के टीके का विकास करने के लिए डीबीटी को केंद्रीय समन्वय एजेंसी नामित किया गया है. डीबीटी की सचिव रेणु स्वरूप ने समाचार एजेंसी भाषा को बताया कि अन्य प्रस्तावों की भी जांच की जा रही है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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