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दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा, मैं आतंकवादी नहीं

Updated at : 04 Oct 2021 10:40 PM (IST)
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दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा, मैं आतंकवादी नहीं

दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर कड़कड़डूमा कोर्ट सुनवाई पूरी हो गई. सुनवाई के दौरान JNU के छात्र शरजील इमाम ने कोर्ट में कहा कि वह कोई आतंकवादी नहीं है और उस पर चल रहा मामला विधि द्वारा स्थापित एक सरकार के कारण नहीं, बल्कि किसी बादशाह के हुक्म का नतीजा है.

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Delhi Riot Case दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट सुनवाई पूरी हो गई. सुनवाई के दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र शरजील इमाम ने कोर्ट में कहा कि वह कोई आतंकवादी नहीं है और उस पर चल रहा मामला विधि द्वारा स्थापित एक सरकार के कारण नहीं, बल्कि किसी बादशाह के हुक्म का नतीजा है.

बता दें कि संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ बयान देने के आरोप में इमाम को गिरफ्तार किया गया था. उसने 2019 में दो विश्वविद्यालयों में भाषण दिया था. जिसमें कथित तौर पर असम और बाकी पूर्वोत्तर को भारत से काटने की धमकी दी गई थी. इस संबंध में दर्ज मामले की सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशंस जज अमिताभ रावत के सामने दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें दी.

जिन भाषणों के लिए इमाम को गिरफ्तार किया गया था वह कथित तौर पर 13 दिसंबर 2019 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया और 16 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में दिए गए थे. शरजील इमाम पर विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज है और वह जनवरी 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं. इमाम के विरुद्ध राजद्रोह का मामला भी दर्ज है.

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान शरजील इमाम के वकील तनवीर अहमद मीर ने अनुरोध करते हुए कोर्ट में कहा कि सरकार की आलोचना करना राजद्रोह नहीं माना जा सकता. तनवीर अहमद मीर ने कहा कि अभियोजन की दलील का पूरा सार यह है कि अब अगर हमारे विरोध में बोलेंगे तो यह राजद्रोह होगा. उन्होंने कहा कि इमाम को सजा इसलिए नहीं दी जा सकती कि उसने सीएए या एनआरसी की आलोचना की.

वकील तनवीर अहमद मीर ने कहा कि शरजील इमाम का अभियोजन विधि द्वारा स्थापित एक सरकार की अपेक्षा किसी बादशाह का हुक्म अधिक प्रतीत होता है. यह वो तरीका नहीं है जैसे किसी सरकार को काम करना चाहिए. सरकार बदल भी सकती है और कुछ भी स्थायी नहीं है. वहीं, विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने कहा कि विरोध जताने के मौलिक अधिकार का अर्थ यह नहीं है कि सार्वजनिक रूप से लोगों को नुकसान पहुंचाया जाए. कोर्ट में उन्होंने कहा कि इमाम के भाषण के बाद हिंसक दंगे भड़के. जमानत का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि उसने यह कहकर अराजकता फैलाने का प्रयास किया कि मुस्लिम समुदाय के लिए उम्मीद नहीं बची है और अब कोई रास्ता नहीं है.

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