Delhi Amendment Bill: राज्य सभा में मोदी सरकार को घेरने की तैयारी, AAP और कांग्रेस ने जारी किया व्हिप
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 06 Aug 2023 11:46 PM
उच्च सदन में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने चार अगस्त को तीन-पंक्ति वाला व्हिप जारी किया, जिसमें कहा गया कि सात अगस्त को राज्यसभा में बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
दिल्ली सेवा विधेयक को राज्यसभा में पेश किये जाने की संभावना के बीच कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अपने सांसदों के लिए तीन लाइव का व्हिप जारी किया है. दोनों पार्टियों ने अपने सांसदों को सोमवार को उच्च सदन के स्थगन तक सदन में मौजूद रहने को कहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 अगस्त को राज्यसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 पेश करेंगे.
जयराम रमेश ने तीन-पंक्ति वाला व्हिप जारी किया
उच्च सदन में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने चार अगस्त को तीन-पंक्ति वाला व्हिप जारी किया, जिसमें कहा गया कि सात अगस्त को राज्यसभा में बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. मुख्य सचेतक ने कहा, राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वे सात अगस्त को सुबह 11 बजे से सदन के स्थगन तक उपस्थित रहें और पार्टी के रुख का समर्थन करें. राज्यसभा में पार्टी के सदस्यों को रविवार को एक पत्र भी भेजा गया. इस पत्र में कहा गया, सात अगस्त, को सुबह पौने 11 बजे से सदन के स्थगन तक राज्यसभा में उपस्थित रहें और पार्टी के रुख का समर्थन करें, क्योंकि विधायी कामकाज के संबंध में महत्वपूर्ण विषयों पर मतदान किया जाएगा. तीन-पंक्ति का व्हिप इस संबंध में पहले ही जारी किया जा चुका है.
AAP ने अपने राज्यसभा सांसदों को को सदन में उपस्थित रहने के लिए जारी किया व्हिप
आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने सभी राज्यसभा सांसदों को 7 और 8 अगस्त को सदन में उपस्थित रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी की है. दिल्ली अध्यादेश बिल पर AAP नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कहा, केंद्र सरकार दिल्ली के अधिकारों को जबरदस्ती छीनने के लिए बिल राज्यसभा में लेकर आ रही है. सोमवार को सभी विपक्षी पार्टियां मिलकर इस बिल का विरोध करेंगी.
अमित शाह दिल्ली सेवा बिल करेंगे पेश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 को पेश करने वाले हैं. दिल्ली सरकार में वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों और पदस्थापना के संबंध में अध्यादेश के स्थान पर इस विधेयक को विपक्षी दलों के बहिर्गमन के बीच गुरुवार को लोकसभा द्वारा पारित कर दिया गया.
एनडीए के पक्ष में संख्या बल
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के दल विधेयक को पारित करने के सरकार के कदम को विफल करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे, भले ही संख्या बल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पक्ष में है. बीजू जनता दल (बीजद) तथा युवजन श्रमिक रायतु कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने विधेयक पर सरकार को अपना समर्थन देने का वादा किया है. राज्यसभा में विपक्षी गठबंधन के करीब 109 सदस्यों के अलावा कपिल सिब्बल जैसे कुछ निर्दलीय सदस्यों के विधेयक के खिलाफ मतदान करने की उम्मीद है. उच्च सदन में अभी 238 सदस्य हैं जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के 100 से अधिक सदस्य हैं. वहीं उसे मनोनीत सदस्यों और कुछ निर्दलीय सदस्यों से समर्थन मिलने की उम्मीद है जो विभिन्न मुद्दों पर कई बार सरकार के पक्ष में मतदान करते रहे हैं. इनके साथ ही उक्त दोनों दलों के समर्थन से राजग को बहुमत प्राप्त होने की संभावना है. लोकसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या 305 है और सरकार को सदन में अविश्वास प्रस्ताव या दिल्ली सेवा संबंधी विधेयक को लेकर विपक्ष से कोई खतरा नहीं है. लोकसभा में बीजद के 12 सदस्य हैं.
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दिल्ली सेवा बिल का इन सांसदों ने किया विरोध
विधेयक पेश किये जाने का कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर एवं गौरव गोगोई, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय और एआईएमआईएम के असदुद्दीन औवैसी आदि ने विरोध किया. विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि वह सदन के नियमों एवं प्रक्रियाओं के नियम 72 के तहत इसका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत सेवा संबंधी विषय राज्य के अधीन होना चाहिए, ऐसे में यह विधेयक अमल में आने पर दिल्ली राज्य की शक्ति को ले लेगा. चौधरी ने कहा कि यह सहकारी संघवाद की कब्रगाह बनने वाला है. आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि वह इस विधेयक को पेश किये जाने का तीन बिन्दुओं पर विरोध कर रहे हैं. इसमें पहला सदन के नियमों एवं प्रक्रियाओं के नियम 72 के तहत है. उन्होंने कहा कि इस सदन को इस प्रकार का कानून बनाने की विधायी शक्ति नहीं है. उन्होंने कहा कि यह संघवाद के सिद्धांतों के खिलाफ है और दिल्ली राज्य की शक्तियों को कमतर करने वाला है. प्रेमचंद्रन ने कहा कि इस विधेयक को लाने का मकसद सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने का प्रयास है.
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