COVID19 : पिछले 24 घंटे में 42 नये मामले और चार मौत, लेकिन समुदाय स्तर पर नहीं हो रहा संक्रमण

Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 26 Mar 2020 5:29 PM

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COVID19 : स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज कोरोना वायरस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि इस वायरस के संक्रमण के चेन को तोड़ने में सामाजिक मेलजोल से दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) प्रभावी साबित हो सकती है. इसलिए सरकार लगातार सोशल डिस्टेंसिंग की बात कर रही है.

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नयी दिल्ली : स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज कोरोना वायरस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि इस वायरस के संक्रमण के चेन को तोड़ने में सामाजिक मेलजोल से दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) प्रभावी साबित हो सकती है. इसलिए सरकार लगातार सोशल डिस्टेंसिंग की बात कर रही है.

स्वास्थ्य के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि 17 राज्यों ने कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए समर्पित अस्पताल चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कोरोना वायरस संक्रमण मच्छरों के जरिये नहीं फैलता है.

लव अग्रवाल ने बताया कि पिछले 24 घंटे में 42 नये मामले आये हैं और चार लोगों की मौत हुई है. अभी तक कुल 649 मामले सामने आये हैं. उन्होंने बतायक कि COVID19 के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके बढ़ने की दर काफी हद तक नियंत्रित है. हालांकि यह शुरुआती स्टेज है. लव अग्रवाल ने कहा कि अभी यह कहने के लिए हमारे पास कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का प्रसार समुदाय के स्तर पर हो रहा है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर हम सोशल डिस्टेंसिंग करें और सटीक इलाज करवायें तो यहां कोरोना वायरस संक्रमण का प्रसार समुदाय के स्तर नहीं होगा.

गौरतलब है कि आज सरकार ने कोरोना वायरस महामारी और उसके आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया है. यह रकम जरूरतमंदों की सहायता के लिए दी जा रही है. वित्त मंत्री ने राहत पैकेज में सभी श्रेणी के लोगों की सहायता को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया है. उन्होंने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए जुटे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 50 लाख रुपये के बीमा कवर का ऐलान भी किया है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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