छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर राणा की हत्या मामले में अदालत ने सुशील कुमार को 25 जून तक न्यायिक हिरासत भेजा

**EDS: SCREENSHOT FROM A VIDEO MADE AVAILABLE FROM DELHI POLICE** New Delhi: Olympics medal-winning wrestler Sushil Kumar and his associate Ajay Kumar after they were arrested in connection with the Chhatrasal Stadium brawl that led to the death of a wrestler, in New Delhi, Sunday, May 23, 2021. (PTI Photo) (PTI05_23_2021_000039A)
Wrestler Sushil Kumar, Judicial custody, 25 June : नयी दिल्ली : दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार के मामले में दिल्ली की रोहिणी अदालत ने छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर राणा की हत्या के मामले में न्यायिक हिरासत 25 जून तक बढ़ा दी है.
नयी दिल्ली : दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार के मामले में दिल्ली की रोहिणी अदालत ने छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर राणा की हत्या के मामले में न्यायिक हिरासत 25 जून तक बढ़ा दी है.
Delhi's Rohini court extends till June 25 the judicial custody of wrestler Sushil Kumar, in connection with the murder of wrestler Sagar Rana at Chhatrasal Stadium
— ANI (@ANI) June 11, 2021
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने सुशील कुमार और अजय कुमार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. अदालत ने कहा कि ”कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. कानून सभी लोगों के साथ समान व्यवहार करता है. हालांकि, संविधान सभी लोगों को जीवन और स्वतंत्रता की गारंटी देता है. चाहे वे आरोपी हों या नहीं. अदालत का कर्तव्य है कि जांच की निष्पक्षता और आरोपित के अधिकारों के बीच संतुलन बनाये रखे.”
मालूम हो कि पहलवान सुशील कुमार को दिल्ली पुलिस ने रविवार की सुबह गिरफ्तार किया था. उनके साथ छत्रसाल स्टेडियम के शारीरिक शिक्षा के शिक्षक अजय कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है. अजय कुमार की गिरफ्तारी मुंडका क्षेत्र से की गयी है.
दिल्ली पुलिस ने पहलवान सुशील कुमार के खिलाफ हत्या, गैर इरादतन हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत आईपीसी की धारा 302, 308, 365, 325, 323, 341,506, 188, 269, 34 और 120बी के अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25, 54 और 59 में मामला दर्ज किया है.
इससे पहले पहलवान सुशील कुमार ने विशेष आहार तथा सप्लीमेंट्स की मांगों को लेकर दिल्ली की एक अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था. मजिस्ट्रेट ने था कि कहा कि “यह स्थापित कानून है कि जाति, धर्म, लिंग, वर्ग के बावजूद सभी व्यक्ति, चाहे प्राकृतिक या न्यायिक कानून की नजर में समान हैं. ”
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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