बच्चों को चपेट में ले रहा कोरोना, शुरुआत में इस लक्षणों से करें पहचान और जल्द कराएं इलाज

Kolkata: A woman adjusts the protective face mask of her child, at a deserted road during the ongoing COVID-induced lockdown in Kolkata, Sunday, May 16, 2021. (PTI Photo/Swapan Mahapatra)(PTI05_16_2021_000065A)
नयी दिल्ली : कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) की दूसरी लहर ने पूरे देश में तबाही मचा रखी है. दूसरी लहर में सबसे ज्यादा संक्रमित युवा हो रहे हैं. पहली लहर में जहां बुजुर्गों को इससे सबसे ज्यादा खतरा था, वहीं दूसरी लहर में युवा वर्ग के लोग तेजी से संक्रमित हो रहे हैं. जबकि, अब कोरोनावायरस बच्चों को भी अपनी चपेट में लेने लगा है. छोटे बच्चों में शुरुआती लक्षणों को पहचान कर जल्द उनका इलाज शुरू किया जा सकता है और इस संक्रमण से बचाया जा सकता है.
नयी दिल्ली : कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) की दूसरी लहर ने पूरे देश में तबाही मचा रखी है. दूसरी लहर में सबसे ज्यादा संक्रमित युवा हो रहे हैं. पहली लहर में जहां बुजुर्गों को इससे सबसे ज्यादा खतरा था, वहीं दूसरी लहर में युवा वर्ग के लोग तेजी से संक्रमित हो रहे हैं. जबकि, अब कोरोनावायरस बच्चों को भी अपनी चपेट में लेने लगा है. छोटे बच्चों में शुरुआती लक्षणों को पहचान कर जल्द उनका इलाज शुरू किया जा सकता है और इस संक्रमण से बचाया जा सकता है.
बच्चों में कोरोना के लक्षण पहचानने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिशा-निर्देशों का एक सेट जारी किया है. इसमें कहा गया है कि चूंकि बच्चों में कोविड-19 के लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, वे शुरू में पता नहीं चल पाते हैं. जिसके परिणामस्वरूप कुछ मामलों में अधिक गंभीर खांसी, बुखार या सांस फूलने लगता है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बच्चों में संक्रमण के कुछ विशेष लक्षण होते हैं, जिन पर अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए.
आम तौर पर बच्चों में वायरस के संक्रमण के काफी कम ही लक्षण देखने को मिलते हैं, या फिर वे लक्षण काफी हल्के हो सकते हैं. बुखार, खांसी, सांस फूलना, थकान, गले में खराश, दस्त, गंध नहीं आना, स्वाद का चला जाना जैसे सामान्य लक्षणों से हम बच्चों में संक्रमण को पहचान सकते हैं. कुछ बच्चों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी हो सकती हैं. इसी प्रकार पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, दाने, ह्दय और तंत्रिका संबंधी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं. इसे मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम कहा जा सकता है.
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ज्यादातर मामलों में बच्चों में संक्रमण के खास लक्षण दिखायी नहीं देते हैं. ऐसे में बच्चों की ज्यादा निगरानी की जरूरत होती है. क्योंकि ऐसे मामलों में संक्रमण का पता समय पर नहीं चल पाता है और इलाज भी शुरू नहीं हो पाता है. मंत्रालय ने कहा कि ऐसे में अगर बच्चे के गले में खराश, खांसी और जुकाम है, लेकिन उसे सांस लेने में कोई तकलीफ नहीं है तब भी डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए. इससे घर पर ही उनका इलाज किया जा सकता है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बच्चों को बुखार होने पर पैरासिटामोल (10-15mg) हर 4 से 6 घंटे में इस्तेमाल किया जा सकता है. खांसी के लिए, गर्म, खारे पानी से गरारे करने से मदद मिलेगी. तरल पदार्थ का सेवन और पौष्टिक आहार अनिवार्य है. एंटीवायरल दवाओं पर भी मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, फेविपिरवीर, इवरमेक्टिन, इओपिनवीर/रितोनवीर, रेमेडेसिविर, उमीफेनोविर, जैसी दवाओं की बच्चों को कोई आवश्यकता नहीं है. केवल रेसपेरेटरी रेट और ऑक्सीजन लेवल की नियमित जांच की जानी चाहिए.
नोट : यह खबर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गयी जानकारी के आधार पर विकसित की गयी है, लेकिन बच्चों को किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें और चिकित्सक की सलाह पर ही कोई दवा दें.
Posted By: Amlesh Nandan.
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