'लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है पारिवारिक पार्टियां', संविधान दिवस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने साधा निशाना

Published by : Pritish Sahay Updated At : 26 Nov 2021 12:31 PM

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Constitution Day: आज संविधान दिवस है. लेकिन कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, शिवसेना, राकांपा, सपा, समेत कुल 14 दलों ने संविधान दिवस समारोह का बहिष्कार करने का ऐलान किया है.

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Constitution Day: संविधान दिवस के मौके पर संसद भवन में संविधान दिवस (Constitution Day) समारोह का आयोजन किया जा रहा है. सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि,कार्यक्रम किसी पॉलिटिकल पार्टी का नहीं था. किसी पीएम का भी नहीं था. यह कार्यक्रम स्पीकर पद की गरिमा थी. यहां बता दें कि, विपक्ष खासकर कांग्रेस ने इस समारोह के बहिष्कार का ऐलान किया है. कांग्रेस, वामपंथी दल, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, शिवसेना, राकांपा, सपा, आईयूएमएल और द्रमुक समेत कुल 14 दलों ने संविधान दिवस समारोह का बहिष्कार कर रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि, संविधान की भावना को चोट पहुंची है. संविधान की एक-एक धारा को चोट पहुंची है. उन्होंने कहा कि जो राजनैतिक दल लोकतांत्रिक व्यक्तित्व खो चुके हों, वो लोकतंत्र की रक्षा कैसे कैसे करेंगे.

गौरतलब है कि, सेंट्रल हॉल में आयोजित हो रहे संविधान दिवस (Constitution Day) कांग्रेस समेत 14 दल विरोध कर रहे हैं. इन दलों का कहना है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार संविधान पर हमले कर रही है. विपक्षी दलों का कहना है कि देश में संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है. इस कारण संविधान दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में ये शामिल नहीं हो रहे हैं.

गौरतलब है कि भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर मोदी सरकार आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम आयोजित कर रही है. यह समारोह उसी का हिस्सा है. गौरतलब है कि पिछले साल भी कांग्रेस ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया था. कांग्रेस का कहना है कि जब सरकार संविधान पर लगातार हमले कर रही है, तो ऐसे में संविधान दिवस (Constitution Day) समारोह का दिखावा क्यों किया जा रहा है. हम कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेंगे.

कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों का भी यही आरोप है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार लगातार संविधान का अपमान कर रही है ऐसे में हम संविधान दिवस (Constitution Day) कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन सकते. टीएससी ने कहा है कि वो संविधान दिवस कार्यक्रम का बहिष्कार नहीं कर रही है, लेकिन उनका कोई भी प्रतिनिधि समारोह में शामिल नहीं होगा. गौरतलब है कि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आज यानी 26 नवंबर को संसद के सेंट्रल हॉल में संविधान दिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है.

Posted by: Pritish Sahay

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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