जन्म प्रमाण पत्र को अनिवार्य दस्तावेज बनाने पर विचार, Voter ID समेत कई कामों में बेहद जरूरी

Published by : Pritish Sahay Updated At : 28 Nov 2022 7:17 PM

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Birth Certificate: केन्द्र सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में संशोधन के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया है. ड्राफ्ट के मुताबिक, शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले, वोटर लिस्ट में नाम, सरकारी नौकरियों, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट जारी करने समेत कई सुविधाओं के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा.

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Birth Certificate: केंद्र सरकार  जन्म प्रमाण पत्र को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है. सरकार स्कूल में दाखिले से लेकर सरकारी नौकरियों तक के लिए अब जन्म प्रमाण पत्र को अनिवार्य दस्तावेज बनाने पर विचार कर रही है. अंग्रेजी अखबार द हिन्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में संशोधन के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया है. इस ड्राफ्ट के मुताबिक, शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले, वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने समेत सरकारी नौकरियों, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट जारी करने समेत कई सुविधाओं के लिए जन्म प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा है.

गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित आरबीडी अधिनियम 1969 में संशोधन करने वाले विधेयक में कहा गया है कि स्थानीय रजिस्ट्रारों द्वारा जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किसी व्यक्ति के जन्म की तारीख और स्थान को साबित करने के लिए किया जाएगा. इसके अलावा
सरकार के प्रस्तावित परिवर्तनों के मुताबिक, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे मृतक के रिश्तेदार के अलावा स्थानीय रजिस्ट्रार को मृत्यु का कारण बताते हुए सभी मृत्यु प्रमाणपत्रों की एक प्रति उपलब्ध कराएं.

शीतकालीन सत्र में पेश हो सकता है विधेयक: द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है. संसद का शीतकालीन सत्र अगले महीने की 7 तारीख (7 December) से शुरू हो रहा है. उम्मीद की जा रही है कि उसी दौरान विधेयक को पेश किया जा सकता है.

ऑनलाइन हो जाएगी पूरी प्रक्रिया: रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के लिए प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन इस कानून में संशोधन के बाद कई उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा. वहीं, डाटाबेस को मतदाता सूची से भी जोड़ा जाएगा. इसका फायदा होगा कि जब कोई व्यक्ति 18 साल का हो जाएगा तो उसका नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया जाएगा और किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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