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तवांग झड़प पर संसद में चर्चा को लेकर कांग्रेस ने कहा, नेहरू जी वाजपेयी जी को कह सकते थे चीन का एजेंट

Updated at : 15 Dec 2022 6:44 PM (IST)
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तवांग झड़प पर संसद में चर्चा को लेकर कांग्रेस ने कहा, नेहरू जी वाजपेयी जी को कह सकते थे चीन का एजेंट

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि किसी भी आवाज को दबाना हमारा सिद्धांत नहीं था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इतिहास के उस पन्ने से सीख लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब पीएम मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो वे गुजरात के स्कूलों में मंदारिन को अनिवार्य करना चाहते थे.

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नई दिल्ली : नौ दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प पर संसद में चर्चा कराने को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि नेहरू जी चाहते, तो इस मांग पर वाजपेयी जी को चीन का एजेंट कह सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा करने की बजाय उनकी मांग को स्वीकार किया.

1962 के विशेष सत्र में 165 सांसदों ने लिया था हिस्सा

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आगे कहा कि उस समय अभिषेक सिंघवी के पिता उस समय एक स्वतंत्र सांसद थे. उन्होंने नेहरू जी और अटल जी को सलाह दी थी कि यह विशेष सत्र गुप्त होना चाहिए और मीडिया में इसकी सूचना नहीं दी जानी चाहिए. उनकी इस सलाह से नेहरू जी सहमत नहीं थे. उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है और लोगों को इसके बारे में जानने का अधिकार है और संसद इसके बारे में क्या सोचती थी. खेड़ा ने कहा कि उस बहस में कुल 165 सांसदों ने हिस्सा लिया था.

पीएम मोदी को इतिहास से लेनी चाहिए सीख

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि किसी भी आवाज को दबाना हमारा सिद्धांत नहीं था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इतिहास के उस पन्ने से सीख लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब पीएम मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो वे गुजरात के स्कूलों में मंदारिन को अनिवार्य करना चाहते थे. चीन के साथ आपका क्या संबंध है? चीनी कंपनी को धोलेरा में ठेका क्यों मिला? क्या दबाव है?

चीनी कंपनी को जम्मू-कश्मीर में ठेका दे रही मोदी सरकार

उन्होंने कहा कि कुछ चीनी कंपनियां ऐसी हैं, जिनका इस्तेमाल भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान किया था. एक और कंपनी है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूरोप और अमेरिका ने ब्लैक लिस्ट कर दिया है, लेकिन मोदी सरकार ने उसे जम्मू-कश्मीर में स्मार्ट मीटर का ठेका दे दिया. तो आप एक चीनी कंपनी को पैसा और डेटा दोनों देते हैं?

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अपनी छवि के ऊपर भारत की सुरक्षा को भी नहीं मानते पीएम मोदी

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर अपना कुछ भी बोलते नहीं हैं और जब वह करते हैं, तो वे चीन को क्लीन चिट देते हैं. भारत आज तक क्लीन चिट के लिए पीड़ित है, जो उन्होंने 20 जून, 2020 को दी थी. चीन अब समझ गया है कि भारतीय पीएम क्या करते हैं. वे अपनी छवि से ऊपर किसी चीज को नहीं मानते, यहां तक ​​कि भारत की सुरक्षा को भी नहीं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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