Coronavirus Outbreak : केवल लॉकडाउन से नहीं, ऐसे हारेगा Coronavirus, राहुल ने कोरोना को हराने का दिया मंत्र

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Nadia: A truck loaded with potato sacks moves past a graffiti created to aware people against the novel coronavirus, during ongoing lockdown at Krishnagar in Nadia, Thursday, April 16, 2020. (PTI Photo) (PTI16-04-2020_000065A)

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi Video Conference) ने बृहस्पतिवार को कहा कि लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) से कोरोना संकट (Coronavirus Pandemic) का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर और रणनीतिक रूप से जांच तथा पूरे देश के एकजुट होकर लड़ने से ही से इस वायरस को पराजित किया जा सकता है.

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नयी दिल्ली : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को कहा कि लॉकडाउन से कोरोना संकट का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर और रणनीतिक रूप से जांच तथा पूरे देश के एकजुट होकर लड़ने से ही से इस वायरस को पराजित किया जा सकता है.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह आग्रह भी किया कि राज्यों और जिलों को सशक्त बनाते हुए पर्याप्त संसाधन मुहैया कराये जाएं तथा ‘न्याय’ योजना की तर्ज पर लोगों की मदद की जाए. गांधी ने वीडियो लिंक के माध्यम से संवादाताओं से कहा कि कोरोना के खिलाफ अभी से विजय की घोषणा करना नुकसानदेह हो सकता है क्योंकि यह लंबी लड़ाई है. उन्होंने कहा, मैं आलोचना के लिए नहीं, रचनात्मक सहयोग के लिए टिप्पणी कर रहा हूं. सभी राजनीतिक दलों और जनता को इस संकट से मुकाबले को मिलकर काम करना होगा.

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गांधी ने कहा, ये समझना होगा कि लॉकडाउन एक पॉज बटन की तरह है, यह किसी भी तरह से कोरोना वायरस का समाधान नहीं है. जब हम लॉकडाउन से बाहर आएंगे तो वायरस फिर आ सकता है. इसलिए हमें जांच पर जोर देना होगा और यह रणनीतिक रूप से करना होगा. उनके मुताबिक वायरस के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार जांच है. जांच करने से ये जान सकते हैं कि वायरस कहां घूम रहा है और फिर उससे लड़ा जा सकता है.

गांधी ने कहा, हमारे यहां प्रति 10 लाख आबादी पर सिर्फ 199 जांच हुई हैं. यह पर्याप्त नहीं है. केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य ने कहा, कोविड वायरस से लड़ने के लिए हमारी मुख्य ताकत राज्य और जिला स्तर पर है. वायनाड में सफलता जिला स्तर की मशीनरी के कारण मिली है। इसलिए मेरा सुझाव है कि कोविड के खिलाफ लड़ाई टॉप-डाउन (ऊपर से नीचे) न होकर बॉटम-अप (नीचे से ऊपर) हो. प्रधानमंत्री राज्यों को सशक्त बनाएं.

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एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने यह दावा भी किया, जिस प्रकार से, जिस गति से पैसा राज्यों को पहुंचना चाहिए, वो नहीं हो रहा. कोरोना से दो मोर्चों पर जंग चल रही है- मेडिकल और आर्थिक. इन दोनों मोर्चे पर रणनीति के साथ लड़ना होगा. केंद्र सरकार की ओर से घोषित 1.70 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को नाकाफी करार देते हुए उन्होंने कहा, बेरोजगारी शुरू हो गई है और इसका बहुत बुरा रूप सामने आने वाला है। रोजगार देने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के लिए पैकेज तैयार कीजिए. बड़ी कंपनियों के लिए पैकेज तैयार कीजिए.

कांग्रेस नेता ने सरकार से आग्रह किया, न्याय योजना की तरह 20 प्रतिशत गरीब लोगों को सीधे पैसा दीजिए. क्योंकि गरीबों को दिक्कत हो रही है और होने वाली है. न्याय योजना की जगह कोई और नाम रख लीजिए. दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव के समय राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस ने न्यूनतम आय गारंटी योजना (न्याय) के तहत पांच करोड़ गरीब परिवारों को प्रति वर्ष 72-72 हजार रुपये देने का वादा किया था.

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देश के कई शहरों में फंसे मजदूरों से जुड़े प्रश्न के उत्तर में गांधी ने कहा, हमारे गोदामों में अनाज का पर्याप्त भंडार है. गरीबों को भोजन दीजिए. जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उनको भी इसमें शामिल कीजिए. खाद्य सुरक्षा का एक रास्ता तैयार कीजिए. उन्होंने लोगों से कोरोना वायरस से नहीं डरने की अपील करते हुए कहा, भारत किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है. हम सब मिलकर इस वायरस को हराएंगे. इसके बाद भारत और तेजी से आगे बढ़ेगा.

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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