लेबर कोड पर टकराव: देशभर में भारत बंद, 10 यूनियनों की हड़ताल, कुछ संगठनों ने किया किनारा
Published by : Nishant Kumar Updated At : 12 Feb 2026 11:38 AM
देशभर में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के गुरुवार को बुलाए गए भारत बंद को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी (आप) ने इस बंद का समर्थन करने का ऐलान किया है, जबकि कर्नाटक से नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (NFITU) ने इससे खुद को अलग कर लिया है.
आम आदमी पार्टी ने कहा कि यह बंद किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि करोड़ों मजदूरों और किसानों के अधिकारों की लड़ाई है. पार्टी ने पंजाब सहित पूरे देश के मजदूरों, किसानों, दुकानदारों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों से शांतिपूर्ण तरीके से भारत बंद को सफल बनाने की अपील की है. ‘आप’ नेताओं के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) से मजदूरों की नौकरी की सुरक्षा कमजोर हुई है और नियोक्ताओं को छंटनी में अधिक छूट दी गई है, जिससे मेहनतकश वर्ग के हित खतरे में हैं.
केंद्र की नीतियों पर हमला, पंजाब मॉडल का जिक्र
पार्टी ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर-विरोधी और किसान-विरोधी करार देते हुए आरोप लगाया कि इन नीतियों से चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाया जा रहा है. ‘आप’ का कहना है कि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा, जिससे असंतोष बढ़ा है. पंजाब सरकार के कामकाज का हवाला देते हुए पार्टी ने दावा किया कि राज्य में न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी, समय पर फसल खरीद और मुफ्त बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी योजनाओं से यह साबित होता है कि वह मजदूरों और किसानों के साथ खड़ी है.
NFITU ने हड़ताल से बनाई दूरी
दूसरी ओर, NFITU ने इस हड़ताल को राजनीतिक करार देते हुए इसमें भाग लेने से इंकार कर दिया है. संगठन के अध्यक्ष वी. वेंकटेश ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चारों नए लेबर कोड मजदूरों के हित में हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की सराहना करते हुए कहा कि वेतन संहिता को देशभर में एक समान लागू करना सकारात्मक कदम है.
बातचीत का रास्ता खुला, हड़ताल की जरूरत नहीं: NFITU
वेंकटेश के मुताबिक उनकी यूनियन से जुड़े संगठनों को निर्देश दिया गया है कि वे हड़ताल में शामिल न हों और सामान्य रूप से काम करें. उन्होंने कहा कि जब सरकार बातचीत के लिए तैयार है तो हड़ताल की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल, खासकर वामपंथी संगठन, इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं.
बंद का असर किन सेवाओं पर पड़ेगा?
संयुक्त केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के मंच ने दावा किया है कि केंद्र की नीतियां मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं, इसी कारण राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है. भारत बंद के चलते बैंकिंग, बीमा, बिजली, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, गैस और जल आपूर्ति जैसी सेवाओं पर आंशिक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में गुरुवार का भारत बंद न सिर्फ श्रमिक संगठनों की ताकत की परीक्षा होगा, बल्कि केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों पर जनसमर्थन का भी संकेत देगा.
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By Nishant Kumar
Nishant Kumar: निशांत कुमार पिछले तीन सालों से डिजिटल पत्रकारिता कर रहे हैं. दैनिक भास्कर के बाद राजस्थान पत्रिका के डिजिटल टीम का हिस्सा रहें. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल-इंटेरनेशनल और स्पोर्ट्स टीम में काम कर रहे हैं. किस्सागोई हैं और देश-विदेश की कहानियों पर नजर रखते हैं. साहित्य पढ़ने-लिखने में रुचि है.
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