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गलवान ही नहीं, दक्षिण चीन सागर के 250 द्वीपों पर भी है ड्रैगन की नजर, बना रहा है कब्जे का प्लान!

Updated at : 05 Jul 2020 3:22 PM (IST)
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गलवान ही नहीं, दक्षिण चीन सागर के 250 द्वीपों पर भी है ड्रैगन की नजर, बना रहा है कब्जे का प्लान!

दक्षिण चीन सागर में तकरीबन 250 द्वीप हैं. इन द्वीपों में खनिज संपदा का अकूत भंडार है. वहीं, दक्षिण चीन सागर के इन द्वीपों पर कब्जे से चीन समुद्री ताकत बनने का भी सपना पाल रहा है.

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नयी दिल्ली: चीन की नौसेना दक्षिणी चीन सागर में युद्धाभ्यास कर रही है. जानकारी के मुताबिक चीनी नौसेना का युद्धाभ्यास 1 जुलाई से जारी है, जिसका विरोध फिलीपिंस लगातार कर रहा है. युद्धाभ्यास की तस्वीरों के साथ ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि चीन के दक्षिणी, उत्तरी और पूर्वी थियेटर कमांड्स ने दक्षिणी चीन सागर, पीला सागर और पूर्वी चीन सागर में अपने युद्ध कौशल का शानदार नमूना पेश किया.

दक्षिण चीन सागर में चीनी नौसेना का युद्धाभ्यास

गौतलब है कि चीन विवादित दक्षिणी चीन सागर के ऐसे इलाके में युद्धाभ्यास कर रहा है जब पूरी दुनिया में कोरोना संकट को लेकर झूठ बोलने के आरोप में उसकी किरकिरी हो रही है. दूसरी और पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में अपनी नापाक विस्तारवादी नीति की वजह से उसे आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

दक्षिण चीन सागर के द्वीपों पर चीन की नजर

भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच चीनी नौसेना के युद्धाभ्यास के बारे में ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि इस युद्धाभ्यास में 054 ए फ्रिगेट्स और 052 डी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रायर्स का इस्तेमाल किया गया है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वी लद्दाख में विवाद के बीच चीन, इस नौसेनिक युद्धाभ्यास के जरिये ये दिखाना चाहता है कि, उसकी सैन्य ताकत बहुत बड़ी है और उसका प्रभाव हर जगह है. रक्षा विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि चीन की नजर केवल गलवान वैली ही नहीं बल्कि दक्षिण चीन सागर के कई द्वीपों पर है.

अकूत खनिज संपदा का खजाना हैं ये द्वीप

जानकारी के मुताबिक दक्षिण चीन सागर में तकरीबन 250 द्वीप हैं. इन द्वीपों में खनिज संपदा का अकूत भंडार है. वहीं, दक्षिण चीन सागर के इन द्वीपों पर कब्जे से चीन समुद्री ताकत बनने का भी सपना पाल रहा है. एक आंकड़े के मुताबिक दुनिया की एक तिहाई यानी 3 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार इसी समुद्री रास्ते से होता है. चीन की मंशा यहां मौजूद द्वीपों पर कब्जा करके, समुद्री रास्ते पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की है. रक्षा विशेषज्ञों को आशंका है कि कोरोना महामारी खत्म होने के बाद हालात सामान्य होते ही चीन इन द्वीपों पर कब्जा कर सकता है, इसलिये दुनिया के बाकी देशों को उसे ऐसा करने से रोकना होगा.

जापान सहित ये देश हैं चीन से काफी खफा

गौरतलब है कि दक्षिणी चीन सागर में चीन की विस्तारवादी नीतियों का जापान, वियतनाम, फिलीपींस, ताईवान और ऑस्ट्रेलिया लगातार विरोध करते रहे हैं. जापान और ऑस्ट्रेलिया को आशंका है कि यदि चीन का इस इलाके में कब्जा हो गया तो उनका द्विपक्षीय व्यापार प्रभावित होगा, वहीं वियतनाम और फिलीपिंस जैसे देशों को डर है कि चीन उनकी आंतरिक राजनीति और भूखंडों पर दखल देने लगेगा. यही वजह है कि 1 जुलाई से शुरू हुये चीन के युद्धाभ्यास का फिलीपिंस लगातार विरोध कर रहा है. अब अमेरिका भी चीन को रोकने के लिये मैदान में आ गया है.

अमेरिका ने भी उतार दिया है अपना जंगी जहाज

एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने भी अपने तीन जंगी जहाजों को दक्षिणी चीन सागर में युद्धाभ्यास के लिये उतार दिया है. जानकारी के मुताबिक इनमें से दो जंगी जहाज, यूएसएस रोनाल्ड रीगन और यूएसएस निमित्ज परमाणु शक्ति से लैस हैं. इन जहाजों के जरिये एक साथ 5 हजार सैनिकों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के जंगी जहाज जापान, वियतनाम और दक्षिण कोरिया के सैन्य ठिकानों के पास युद्धाभ्यास करेंगे. अमेरिका का ये युद्धाभ्यास दक्षिण चीन सागर में चीनी दखल को रोकने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है.

भारत और चीन के बीच भी जारी है विवाद

बता दूं कि भारत भी चीन की विस्तारवादी नीतियों का आलोचक है. मई के पहले सप्ताह से ही भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी को लेकर तनाव है. चीन गलवान घाटी पर अपना दावा कर रहा है जिसका भारत ने विरोध किया है. 15 जून की रात को ये तनाव अपनी चरम सीमा में पहुंच गया जब गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गये. 3 जुलाई को पीएम मोदी ने लेह का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने सैनिकों को संबोधित करते हुये कहा था कि हमें दुश्मन से सख्ती से निपटना होगा.

Posted By- Suraj Kumar Thakur

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