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'कहीं दूसरा कुंभ न बन जाए चार धाम यात्रा, 14 मई से निकलने वाला है श्रद्धालुओं का जत्था'

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रावत सरकार को लगाई फटकार.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रावत सरकार को लगाई फटकार.
फाइल फोटो.

नैनीताल : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रावत सरकार से पूछा है कि चार धाम यात्रा को लेकर कोई मानक तय किया गया है, जबकि आगामी 14 मई से यह शुरू होने वाला है. चीफ जस्टिस आरएस चौहान और जस्टिस आलोक वर्मा की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा कोरोना प्रबंधन को लेकर जारी एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह चिंता जाहिर की है. पीठ ने इस तीर्थयात्रा को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे दूसरे कुंभ के रूप में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही सुनवाई के दौरान उपस्थित प्रधान सचिव ओम प्रकार ने कहा कि तीर्थयात्रा को लेकर गुरुवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में मानक तय कर दिए जाएंगे. उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि बैठक में कोरोना वायरस संक्रमण की वर्तमान हालात के मद्देनजर में राज्य में कर्फ्यू लगाने, लॉकडाउन लागू करने और कॉलेजों के संचालन को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा तथा वर्तमान चुनौतियों के मद्देनजर एक नीति तैयार की जाएगी. हालांकि, इसके पहले राज्य से पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि बाहरी लोगों के चार धाम की यात्रा शुरू करने के पहले कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट दिखाना जरूरी होगा, जबकि सरकार की ओर से इसे लेकर अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया है.

इसके अलावा, अदालत ने 12 मई को होने वाली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को रेमडेसिविर और कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर सूचित करने का निर्देश भी दिया है. राज्य में बीते कई हफ्तों से कोरोना मरीजों के इलाज के दौरान डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाले रेमडेसिविर की किल्लत बनी हुई है.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील दुष्यंत मैनाली ने कहा कि अदालत ने राज्य सरकार को दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों के कोरोना टेस्ट के लिए मोबाइल टेस्टिंग वैन शुरू करने के भी सख्त निर्देश दिए हैं. अदालत ने रावत सरकार को राज्य में कोविड डेडिकेटेड अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं. फिलहाल, राज्य में केवल पांच कोविड डेडिकेटेड अस्पताल की संचालित किए जा रहे हैं, जो इस महामारी के लिए काफी नहीं हैं. इसके अलावा, अदालत ने राज्य सरकार से आईसीयू बेड की संख्या बढ़ाने, ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने और पीपीई को लेकर प्रावधान करने की भी बात कही है.

सुनवाई के दौरान उपस्थित एक दूसरे वकील शिव भट्ट ने कहा कि अदालत ने राज्य सरकार से गरीब तबके के लोगों के लिए उठाए गए कदम के बारे में भी सवाल पूछे. अदालत ने सरकार को इस बात की सूचना देने का निर्देश देते हुए कि अस्पतालों में गरीब लोगों के इलाज के लिए 25 फीसदी बेड भी उपलब्ध नहीं हैं. अदालत ने स्वास्थ्य एवं वित्त सचिव अमित नेगी को 12 मई तक इससे संबंधित विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया है.

Posted by : Vishwat Sen

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Published Date

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