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Chamoli Disaster : बिहार के मनीष का कोई सुराग नहीं, अपनों के इंतजार में पथराई आंखें

By संवाद न्यूज एजेंसी
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uttarakhand news
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PTI
  • चाय छोड़कर बिजली फाल्ट ढूंढने सुरंग में गए थे इंजीनियर अभिषेक

  • बिहार के मनीष दिसंबर में शादी के बाद जनवरी में लौटे थे ड्यूटी पर

  • परिजनों की उम्मीद टूट रही

तपोवन जल विद्युत परियोजना के इंजीनियर अभिषेक पंत रविवार को यानी आपदा के दिन अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने ढाक गांव जाने को तैयार थे, तभी करीब साढ़े नौ बजे अभिषेक के मोबाइल की ‍घंटी बजी और वे दोस्तों से पांच मिनट में लौटकर आने की बात कहकर चले गए. फोन परियोजना साइट से आया था. वहां सुरंग की बिजली लाइन में फाल्ट आ गया था.

अभिषेक फाल्ट ढूंढने निकले तो कुछ देर बाद ही पानी का जलजला आ गया और पूरी टनल मलबे से पट गई. तब से अभिषेक लापता हैं. उनके लौटने की उम्मीद में उनके परिजन परियोजना स्थल के बाहर डटे हैं. अभिषेक बीटेक करने के बाद तीन साल से तपोवन परियोजना में कार्य कर रहे हैं. उनकी अप्रैल माह में सगाई होनी है.

बिहार के मनीष कुमार तपोवन परियोजना में असिस्टेंट इंजीनियर हैं. बीते दिसंबर माह में शादी होने के बाद मनीष तीन जनवरी को अपनी ड्यूटी पर तपोवन लौट आए थे. आपदा के दिन वे भी परियोजना की टनल में अपना काम कर रहे थे. ‌जल प्रलय के बाद से मनीष का भी पता नहीं चल सका है. आपदा से करीब एक घंटे पहले मनीष ने अपनी पत्नी से बात कर घरवालों की कुशलक्षेम पूछी थी और सुरंग में काम करने के लिए जाने की बात कही थी. उनके ससुर अरविंद कुमार और भाई मृत्युंजय कुमार पिछले छह दिनों से उनके सुरंग से बाहर आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

सात फरवरी रविवार को ऋषि गंगा के जल प्रलय के बाद तपोवन सुरंग में फंसे लोगों के परिजनों को अभी भी अपनों के लौटने की उम्मीद है. तपोवन में आपदा का मंजर और माहौल बेहद डरावना है. चमोली जिले के किमाणा गांव के तीन भाइयों की जोड़ी भी पानी के सैलाब आने के बाद से लापता हैं. किमाणा गांव के रामकिशोर, अरविंद और रोहित परियोजनास्थल पर

मजदूरी करने आए थे. अपने लापता भाइयों की खोज में तपोवन पहुंचे मनोज भंडारी ने बताया कि उसका भाई रामकिशोर और चचेरे भाई अरविंद व रोहित एक साथ सुरंग में गए थे, लेकिन लौटकर नहीं आए. सहारनपुर के सेकपुरा गांव का अबराल और फैजान छह दिनों से रैणी गांव में हैं. उनके भाई चांद और जीसान ऋषि गंगा परियोजना में मजदूरी करते थे. एक फरवरी को ही दोनों भाई

ठेकेदार के माध्यम से परियोजना में मजदूरी करने पहुंचे थे. अबराल ने बताया कि घटना के दिन चांद का सुबह नौ बजे उसे फोन आया था, लेकिन बात नहीं हो पाई. वे अपने भाइयों की तलाश में दिनभर भटक रहे हैं. घर से फोन आ रहे हैं, उन्हें क्या जवाब दूं. चकराता देहरादून के गजेंद्र सिंह सुरंग में फंसे अपने बड़े भाई विक्रम चौहान की ढूंढखोज में दिनभर बैराज और सुरंग साइट रेस्क्यू टीमों को उम्मीदभरी नजरों से देख रहे हैं. गजेंद्र ने बताया कि आपदा के सुबह ही नौ बजे विक्रम की उनसे बात हुई थी. उन्होंने घरवालों की राजी खुशी पूछी थी​.

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