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चीन को छक्का छुड़ाने के लिए भारत ने पूर्वी लद्दाख में बनाई दुनिया की सबसे ऊंची सड़क, तोड़ा बोलिविया का रिकॉर्ड

Updated at : 04 Aug 2021 8:27 PM (IST)
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चीन को छक्का छुड़ाने के लिए भारत ने पूर्वी लद्दाख में बनाई दुनिया की सबसे ऊंची सड़क, तोड़ा बोलिविया का रिकॉर्ड

पूर्वी लद्दाख के उमलिंगला पास में बीआरओ की ओर से इस सड़क के निर्माण के बाद भारत ने बोलिविया का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.

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नई दिल्ली : भारत ने पड़ोसी देश चीन को छक्का छुड़ाने का पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही एक नई ऊंचाई भी हासिल की है. सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने पूर्वी लद्दाख में दुनिया की सबसे ऊंची सड़क बनाने में कामयाबी हासिल की है. बीआरओ की ओर से यह सड़क पूर्वी लद्दाख के उमलिंगला पास में समुद्र तल से करीब 19,300 फीट की ऊंचाई पर बनाई गई है.

रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पूर्वी लद्दाख के उमलिंगला पास में बीआरओ की ओर से इस सड़क के निर्माण के बाद भारत ने बोलिविया का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. अभी तक दुनिया की सबसे ऊंची सड़क का रिकॉर्ड बोलिविया के नाम था. बोलिविया की उतुरुंसू ज्वालामुखी के नजदीक समुद्र तल से 18, 953 फीट की ऊंचाई पर सड़क का निर्माण कराया गया है.

मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पूर्वी लद्दाख में बीआरओ की यह सड़क 52 किलोमीटर लंबी है और उमलिंगला पास के जरिए पूर्वी लद्दाख को चुमार सेक्टर से जोड़ती है. यह सड़क स्थानीय लोगों के लिए काफी लाभदायक होगी. इसका कारण यह है कि यह चिसुम्ले और डेमचॉक को लेह से जोड़ने के लिए वैकल्पिक रास्ता देती है.

मंत्रालय के अनुसार, इस सड़क के बनने के बाद लद्दाख की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और यहां पर पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. मंत्रालय के अनुसार, इस सड़क को बनाने में बीआरओ को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इस दौरान खराब मौसम से भी लगातार सामना करना पड़ा. ठंड के मौसम में यहां पर तापमान माइनस 40 डिग्री तक नीचे चला जाता था. साथ ही, सामान्य जगहों पर भी ऑक्सीजन लेवल में 50 फीसदी की गिरावट आ जाती थी.

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि बीआरओ ने यह उपलब्धि खराब मौसम से जूझते हुए अपनी संकल्पशक्ति के बल पर हासिल किया है. यह सड़क नेपाल में माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप से भी ज्यादा ऊंचाई पर है. नेपाल में माउंट एवरेस्ट का दक्षिणी बेस कैंप 17,598 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जबकि तिब्बत में स्थित उत्तरी बेस कैंप 16,900 फीट की ऊंचाई पर है.

मंत्रालय के अनुसार, वहीं सियाचिन ग्लेशियर से भी यह काफी ऊंचा है, जो कि 17,700 फीट की ऊंचाई पर है. इसके अलावा, लेह में स्थित खारदुंग ला पास की बात करें, तो उसकी भी ऊंचाई केवल 17,582 फीट ही है.

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