Brand Hemant: छात्र-आंदोलन ने कितना डेंट किया इमेज?

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छात्र आंदोलन और 'ब्रांड हेमंत': छवि, शासन और जवाबदेही की त्रिकोणीय चुनौती

2024 के विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन ने स्वयं को झारखंड की राजनीति का सबसे विश्वसनीय चेहरा साबित किया था. लेकिन JPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन अब उनके सबसे बड़े राजनीतिक निवेश 'जनविश्वास'. को चुनौती देता दिखाई दे रहा है.

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जोहर. आज 6 अगस्त है. आज से झारखण्ड का विधान-सभा सत्र शुरू होने जा रहा है.

झारखंड की राजनीति में Hemant Soren ने स्वयं को केवल एक मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे क्षेत्रीय नेता के रूप में स्थापित किया है, जिसकी राजनीतिक पूंजी आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और जनविश्वास पर टिकी रही है.

2024 के विधानसभा चुनाव में उनकी वापसी ने यह संदेश दिया था कि ब्रांड हेमंत केवल चुनावी नारा नहीं, बल्कि जनता के साथ एक भावनात्मक और राजनीतिक लगाव है.

लेकिन आज, Ranchi की सड़कों पर पिछले लगभग 12 दिनों से चल रहे student-protest ने इसी ब्रांड की सबसे कठिन परीक्षा शुरू कर दी है.

JPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, पारदर्शिता पर सवाल और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोपों ने हजारों युवाओं को आंदोलन के लिए प्रेरित किया है.

यह अब सिर्फ भर्ती से जुड़ा विवाद नहीं रह गया है. यह भरोसे के संकट में बदल रहा है- वही भरोसा जिस पर Brand Hemant खड़ा हुआ था.

आइए, 5 बिंदुओं में समझते हैं कि छात्र विरोध-प्रदर्शनों ने Brand Hemant को कैसे डेंट किया है.

1. Brand की सबसे बड़ी पूंजी होती है विश्वास

किसी भी राजनीतिक ब्रांड की सफलता केवल योजनाओं या घोषणाओं से नहीं मापी जाती. उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है जनता का विश्वास.

हेमंत सोरेन ने अपने राजनीतिक सफर में स्वयं को उन वर्गों की आवाज के रूप में प्रस्तुत किया, जिन्हें लंबे समय तक सत्ता के केंद्र से दूर रखा गया.

मईयां सम्मान योजना, ग्रामीण रोजगार, आदिवासी अधिकार, स्थानीय पहचान और जनसुनवाई जैसे कार्यक्रमों ने उनकी सरकार को संवेदनशील शासन की छवि दी.

लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर उठते सवाल इसी संवेदनशीलता को चुनौती दे रहे हैं. क्योंकि छात्र किसी राजनीतिक दल का वोट-बैंक नहीं होते, बल्कि भविष्य की सामाजिक पूंजी होते हैं. जब यही वर्ग सड़कों पर उतरता है, तब सरकार की नीतियों से अधिक उसकी विश्वसनीयता कठघरे में खड़ी होती है.

2. युवा असंतोष केवल रोजगार का प्रश्न नहीं

आज का छात्र केवल नौकरी नहीं मांग रहा. वह निष्पक्ष अवसर मांग रहा है.

झारखंड जैसे राज्य में सरकारी नौकरियां सामाजिक गतिशीलता का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं. ऐसे में यदि चयन प्रक्रिया पर संदेह पैदा होता है, तो केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की वैधता प्रभावित होती है.

यही कारण है कि रांची का आंदोलन केवल JPSC तक सीमित नहीं दिखाई देता.

यह उन युवाओं की बेचैनी का प्रतीक बन रहा है जो वर्षों की तैयारी के बाद भी व्यवस्था पर भरोसा खोने लगे हैं.

3. 'आपकी सरकार, आपके द्वार' बनाम 'छात्र सड़क पर'

16 नवंबर, 2021 को तत्कालीन हेमंत सरकार ने प्रशासन को सीधे लोगों तक पहुंचने के मकसद से उलिहातू से आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार नाम की एक पहल शुरू की थी.

यह तरीका उनकी राजनीतिक शैली और बातचीत की रणनीति का एक अहम हिस्सा बन गया.

अब अगर वही सरकार छात्रों के सामने लगातार विरोध-प्रदर्शन करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं छोड़ती है, तो इससे यह संदेश जाता है कि बातचीत के लिए बने संस्थागत तंत्र कुछ हद तक कमजोर हो गए हैं.

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ध्यान देने वाली बात यह है कि यह चर्चा पिछले एक-दो दिनों की बातचीत पर नहीं, बल्कि पिछले 10 से 12 दिनों में बनी स्थिति पर आधारित है.

4. विपक्ष को मिला नया राजनीतिक मुद्दा

छात्र आंदोलनों का एक स्वाभाविक राजनीतिक आयाम भी होता है.

यदि सरकार समय रहते ठोस समाधान प्रस्तुत नहीं करती, तो विपक्ष इसे सरकार की विफलता, युवाओं की उपेक्षा और JPSC जैसे संस्थानों में भ्रष्टाचार के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करेगा.

विशेष रूप से ऐसे समय में, जब Gen Z ने जंतर-मंतर पर इन्हीं मुद्दों को लेकर सियासी भूचाल ला दिया, झारखंड का यह आंदोलन राज्य सरकार के लिए बोनस पोलिटिकल सिरदर्द ही हैं.

5. संकट नहीं, नेतृत्व की परीक्षा

हर बड़ा जनआंदोलन किसी सरकार के लिए केवल राजनीतिक चुनौती नहीं होता, बल्कि नेतृत्व की परीक्षा भी होता है.

रांची की सड़कों पर बैठे छात्र किसी दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा और निष्पक्ष अवसर की मांग कर रहे हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने सबसे बड़ा अवसर प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय नेतृत्व दिखाने का है.

यदि मुख्यमंत्री स्वयं आंदोलनकारी छात्रों के बीच पहुंचकर उनकी बातें सुनें, अभिभावकों से संवाद करें और सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दिलाएं कि किसी भी योग्य अभ्यर्थी का भविष्य भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा, तो यह केवल एक राजनीतिक संदेश नहीं होगा, बल्कि विश्वास बहाली की शुरुआत होगी.

इसके साथ ही समयबद्ध और स्वतंत्र जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई, पारदर्शी परीक्षा कैलेंडर तथा युवा विश्वास संवाद जैसे स्थायी मंच की घोषणा सरकार की गंभीरता को स्थापित कर सकती है.

2024 झारखण्ड विधान-सभा चुनाव पर एकलौती पुस्तक 'ब्रांड हेमंत' यहां से पढ़ सकते है

Brand Hemant केवल योजनाओं या चुनावी जीत से नहीं बना, बल्कि जनता के साथ बने भावनात्मक रिश्ते से खड़ा हुआ है. यदि वे इस संकट को संवेदनशीलता, संवाद और निर्णायक कार्रवाई से संभालते हैं, तो यह आंदोलन उनकी छवि को कमजोर करने के बजाय और अधिक विश्वसनीय बना सकता है.

आखिरकार, लोकतंत्र में सबसे मजबूत नेता वही होता है, जो नाराज युवाओं को विरोधी नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य के रूप में देखता है.

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अचल प्रियदर्शी

लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 32 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  4. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  5. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  6. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  7. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  8. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  9. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  10. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  11. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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