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कोरोना के बाद ब्लैक फंगस का प्रकोप, जानिए क्यों और कैसे प्रभावित कर रहा है लोगों को...

Updated at : 09 May 2021 6:52 PM (IST)
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कोरोना के बाद ब्लैक फंगस का प्रकोप, जानिए क्यों और कैसे प्रभावित कर रहा है लोगों को...

अगर आप कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं, तो लापरवाह ना बनें, क्योंकि एक खतरा आप पर अब भी बना हुआ है और लापरवाही आपकी जान भी ले सकती है. ऐसा हम नहीं बल्कि विशेषज्ञ कह रहे हैं. इन दिनों देश में कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए लोगों में ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ता जा रहा है.

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अगर आप कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं, तो लापरवाह ना बनें, क्योंकि एक खतरा आप पर अब भी बना हुआ है और लापरवाही आपकी जान भी ले सकती है. ऐसा हम नहीं बल्कि विशेषज्ञ कह रहे हैं. इन दिनों देश में कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए लोगों में ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ता जा रहा है.

ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस

डाॅक्टरों का दावा है कि कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के तीन सप्ताह कुछ लोगों में ब्लैक फंगस का संक्रमण देखा जा रहा है. महाराष्ट्र और गुजरात में ऐसा संक्रमण ज्यादा सामने आया है. इस संक्रमण के शिकार लोगों की जान बचाने लिए डाॅक्टरों को उनकी आंख तक निकालनी पड़ रही है. कल गुजरात के सूरत से ऐसी खबर आयी थी कि वहां ब्लैक फंगस संक्रमण के सौ मामले सामने आये. इन मरीजों में से सात को अपनी आंख गंवानी पड़ी क्योंकि संक्रमण के कारण उनकी जान बचाने के लिए यह जरूरी था.

शुगर के मरीजों में ज्यादा हो रहा है ये संक्रमण

म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस एक तरह का फंगल इंफेक्शन है, जो कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना मरीजों के ठीक होने के बाद पाया जा रहा है. यह इंफेक्शन अधिकतर शुगर के मरीजों में देखा जा रहा है. इस संक्रमण की वजह से आंखों और जबड़े पर असर होता है. यह संक्रमण खतरनाक होता है और इससे मरीज की जान भी जा सकती है. इस संक्रमण के बाद समय पर इलाज जरूरी है अन्यथा मरीज की आंख तक निकालनी पड़ रही है.

कब हो जायें सावधान

विशेषज्ञों का कहना है कि माइल्ड और माडरेट कोरोना संक्रमण के मरीजों में ब्लैक फंगस के केस ना के बराबर मिलते हैं. यह वैसे मरीजों में देखे गये हैं जिन्हें आॅक्सीजन ज्यादा समय तक लगा रहा. स्टेराॅयड दी गयी. अगर कोरोना से ठीक हुए मरीजों को दोबारा बुखार, आंख लाल होना साइनस इत्यादि की समस्या नजर आये, तो सावधान हो जायें और डाॅक्टर से संपर्क करें.

डरने की नहीं है जरूरत

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने शुक्रवार को कहा था कि कोविड और म्यूकोरमाइकोसिस में कोई संबंध नहीं है. यह बीमारी हर कोविड मरीजों को हो ऐसा जरूरी नहीं है. उन्होंने कहा कि जिन्हें हाई शुगर की समस्या है वैसे लोगों में यह बीमारी देखने को मिली है. उन्होंने कहा कि यह कोई बड़ा प्रकोप नहीं है और इससे बचा जा सकता है. यह एक ऐसा फंगस होता है जो गीली सतह पर प्रजनन करता है. वैसे कोविड के मरीज जिनको मधुमेह नहीं है, उनको इस फंगस का इंफेक्शन होना बहुत ही असामान्य है.

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उन्होंने कहा कि कुछ खास बातों का ध्यान रखकर इससे आसानी से बच सकते हैं. सबसे पहले किसी को भी अपने ब्लड शुगर की नियमित जांच करानी चाहिए और उसपर नियंत्रण रखना चाहिए. दूसरे कोविड-19 के उपचार में स्टेरॉयड का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए. तीसरे ह्यूमिडिफायर में साफ पानी का इस्तेमाल हो. चौथे कोविड-19 रोगी को साफ-सफाई के साथ रखें. पांचवें अगर कोई नया मुंह का अल्सर दिखाई देता है तो इसका तुरंत इलाज करना होगा.

Posted By : Rajneesh Anand

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