MP Election 2023: बीजेपी ने जारी की तीसरी लिस्ट, कांग्रेस नेता कमलनाथ को छिंदवाड़ा में घेरने का प्लान तैयार
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 26 Sep 2023 5:28 PM
MP Election 2023 : मनमोहन शाह बालाघाट के बैहर में पंचायत इंस्पेक्टर रह चुके हैं. नौकरी छोड़कर उन्होंने राजनीति में कदम रखा था. जानें उनकी बेटी मोनिका बट्टी को छिंदवाड़ा की अमरवाड़ा सीट से उतारकर बीजेपी ने क्या खेला दांव
MP Election 2023 : मध्य प्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले बीजेपी उम्मीदवारों की सूची जारी कर रही है. मंगलवार को बीजेपी ने अपनी एक और लिस्ट जारी कर दी है. बीजेपी ने एक और सीट पर अपना प्रत्याशी घोषित करने का काम किया है. पार्टी ने मोनिका बट्टी को छिंदवाड़ा की अमरवाड़ा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है. आपको बता दें कि सोमवार को ही बीजेपी की दूसरी लिस्ट जारी हुई थी. बीजेपी ने रणनीति के तहत कमलनाथ को उनके ही गढ़ में घेरने के लिए मोनिका बट्टी को यहां से उतारा है. इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने आदिवासी बहुल अमरवाड़ा सीट पर यह दांव खेला है. मोनिका बट्टी की बात करें तो उनके पिता मनमोहन शाह भी गोंडवाना पार्टी से पूर्व विधायक रह चुके हैं.
अमरवाड़ा को लेकर क्या थी चर्चा
अमरवाड़ा को लेकर पहले से ही चर्चा हो रही थी. राजनीतिक गलियारों में खबरें थी कि अमरवाड़ा से इस बार बीजेपी मोनिका बट्टी को टिकट दे सकती है. यहां खास बात यह है कि बीजेपी ने उन्हें सात दिन पहले ही पार्टी में शामिल किया था. कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को उनके गृह क्षेत्र में घेरने के उद्देश्य से मोनिका बट्टी को सदस्यता दिलाई गई थी. पूर्व विधायक और मोनिका बट्टी के पिता मनमोहन शाह इसी सीट से निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं.
भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने मध्य प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव हेतु एक नाम पर अपनी स्वीकृति प्रदान की। pic.twitter.com/wTvTgQCuKs
— BJP Madhya Pradesh (@BJP4MP) September 26, 2023
कौन हैं मनमोहन शाह जानें
मनमोहन शाह बालाघाट के बैहर में पंचायत इंस्पेक्टर रह चुके हैं. नौकरी छोड़कर उन्होंने राजनीति में कदम रखा था. 2003 के विधानसभा चुनावों में मनमोहन शाह निर्दलीय लड़े और कांग्रेस-बीजेपी दोनों को पराजित किया. इसके बाद वे सुर्खियों में आए. हालांकि साल 2008 में वह चुनाव हार गए थे. उन्होंने अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी का गठन किया था, जो उस समय तक कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए चुनौती बन चुकी थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में भी गोंडवाना को अच्छे खासे वोट प्राप्त हुए थे. यानी जनता के बीच उनकी खासी पकड़ है.
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कमलनाथ का पूरा फोकस मध्य प्रदेश पर
पिछले छह सालों की बात करें तो प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ अपना पूरा फोकस मध्य प्रदेश पर कर रखा है. कांग्रेस ने 2018 का विधानसभा चुनाव जीता था और प्रदेश में अपना वनवास खत्म किया था, लेकिन सिंधिया और उनके समर्थकों के बगावत के बाद कमलनाथ की कुर्सी चली गयी थी. मुख्यमंत्री पद से कमलनाथ जरूर हट गये थे लेकिन इसके बाद भी कमलनाथ ने मध्य प्रदेश पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित रखा. कमलनाथ अकेले दम पर कांग्रेस को जिताने के लिए मशक्कत करते नजर आ रहे हैं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते रहे.
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बात करें छिंदवाड़ा की तो, मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पहली दफा छिंदवाड़ा से 1980 में लोकसभा के लिए चुने गये थे और 1997 में उपचुनाव में उनकी एकमात्र पराजय के साथ उन्होंने कई दफा इस लोकसभा सीट से जीत का परचम लहराया. लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी मध्य प्रदेश में 29 लोकसभा सीटों में से 28 सीटें जीतने में सफल रही लेकिन छिंदवाड़ा से कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ ने 35 हजार से अधिक वोटों से जीत का परचम लहराया. आपने किले को मजबूत करने के लिए पिता-पुत्र इलाके में खासे सक्रिय नजर आते हैं. यही वजह है कि बीजेपी कमलनाथ को इस क्षेत्र में घेरना चाहती है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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