पंजाब में मुश्किल है भाजपा की राह ? कितना होगा किसान आंदोलन का नुकसान

Updated at : 21 Dec 2020 10:14 PM (IST)
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पंजाब में मुश्किल है भाजपा की राह ? कितना होगा किसान आंदोलन का नुकसान

पंजाब में भाजपा की पकड़ कमजोर हो रही है, ऐसा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि कृषि बिल को लेकर पंजाब और हरियाणा के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. पंजाब में उनके सहयोगी अकाली दल ने भी इस आंदोलन में भाजपा के साथ खड़ी नहीं है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसानों की मांग के साथ खड़े हैं.

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पंजाब में भाजपा की पकड़ कमजोर हो रही है, ऐसा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि कृषि बिल को लेकर पंजाब और हरियाणा के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. पंजाब में उनके सहयोगी अकाली दल ने भी इस आंदोलन में भाजपा के साथ खड़ी नहीं है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसानों की मांग के साथ खड़े हैं.

इनमें से ज्यादातर सिख समुदाय के किसान शामिल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून को लेकर किसानों के मन के डर को खत्म करने की कोशिश की लेकिन आंदोलन पर कुछ खास असर नहीं पड़ा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले दिनों रकाबगंज गुरुद्वारा में माथा टेका. पीएम मोदी के गुरुद्वारा जाने पर अलग- अलग प्रतिक्रिया आयी. सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें खूब शेयर की गयी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कदम से संदेश देने की कोशिश की.

भाजपा पंजाब में होती अपनी कमजोर पकड़ को और मजबूत करने में लगी है. भारतीय जनता पार्टी पंजाब में खुद को लगातार मजबूत करने में लगी है लेकिन इस बार हो रहा है किसान आंदोलन उनके लिए नयी परेशानियां खड़ी करेगी. ऐसा माना जाता है कि मोदी फैक्टर सिर्फ हिंदू बहुल क्षेत्रों में काम करता है. भारतीय जनता पार्टी को साल 2019 में गुरदासपुर और होशियारपुर से जीत मिली है.

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भारतीय जनता पार्टी लगातार कोशिशों के बाद भी इस राज्य में पिछले 25 सालों से ना तो अफी शेयर बढ़ा सकी औऱ ना ही वोट शेयर में ही कुछ कमाल कर सकती है. पार्टी का वोट शेयर 5 से 8 फीसद के बीच रहता है.

राजनीतिक पंडितों की मानें तो पार्टी की पकड़ अब शहरों मे और उच्च जाति वर्ग के लोगों के बीच भी कमजोर पड़ रही है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में अरुण जेटली को हार का सामना करना पड़ा तो साल 2019 में हरदीप सिंह पुरी की हार भी यही संकेत दे रही है.

भारतीय जनता पार्टी किसी बड़े सिख नेता को अपने साथ नहीं कर पायी. नवजोत सिंह सिद्धू भाजपा में रहे लेकिन अकाली दल के साथ उनका तालमेल नहीं बैठ और सिद्दू अलग होकर कांग्रेस के साथ चले गये पार्टी ने हाल में आरपी सिंह,तजिंदर बग्गा और बख्शी जैसे सिख चेहरों को आगे करने में लगी है.

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इस सूची में इतने ही नहीं गायक हंस राज हंस और दलेर मेहंदी जैसी प्रसिद्ध हस्तियां भी हासिल हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी करतारपुर कॉरिडोर के जरिए सिखों के दिल में जगह बनाने की कोशिश की है. किसान आंदोलन के बाद भारतीय जनता पार्टी के लिए पंजाब में खुद को मजबूत करना और मुश्किल साबित हो सकता है.

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