BJP Foundation Day: 1984 में केवल दो सीट से 2019 में 'ट्रिपल सेंचुरी' तक, स्थापना दिवस पर जानें 'कमल' खिलने की कहानी

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 06 Apr 2024 7:08 PM

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atal bihari modi and lal krishna

BJP Foundation Day: लोकसभा चुनाव 2024 के बीच भारतीय जनता पार्टी आज अपना 42वां स्थापना दिवस मना रही है. 1980 में 6 अप्रैल को ही बीजेपी की स्थापना हुई थी. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा 1951 में स्थापित भारतीय जन संघ से इस नयी पार्टी का जन्म हुआ. 1984 में बीजेपी ने लोकसभा की दो सीट जीतने में कामयाब रही थी. बीजेपी ने उस समय पहली बार अपना जीत का खाता खोला था. उसके बाद बीजेपी की स्थिति लगातार अच्छी होती गई और 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में पार्टी 370 से अधिक सीटें जीतने का दावा ठोक रही है. स्थापना दिवस पर आइये जानते हैं, आखिरी 42 साल में बीजेपी का कुनबा कैसे बढ़ता गया.

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BJP Foundation Day: स्थापना दिवस पर सबसे पहले जानते हैं, आखिर भारतीय जनता पार्टी की शुरुआत कैसे हुई? बीजेपी को शुरुआती दिनों में किस नाम से जाना जाता था. दरअसल महात्मा गांधी की हत्या के बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हिंदू महासभा से इस्तीफा दे दिया था. उसके बाद उन्होंने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की. इसके संस्थापक सदस्य थे, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, प्रोफसर बलराज मधोक और दीनदयाल उपाध्याय. उस समय इस पार्टी को दीपक चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था. मुखर्जी के निधन के बाद जनसंघ के कई लोग अध्यक्ष बने. 1967 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय इसके अध्यक्ष बने थे. उसके बाद 1972 में अटल बिहारी बाजपेयी और फिर 1977 में लाल कृष्ण आडवाणी ने अध्यक्ष पद को संभाला.

1977 में जनसंघ का जनता पार्टी में विलय

1977 में भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हो गया था. दरअसल उस समय पहली बार केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी. जिसमें अन्य दलों को शामिल होने के लिए विलय करने की शर्त रखी गई थी. शर्तों के आधार पर जनसंघ का भी जनता पार्टी में विलय हो गया. मोरारजी देसाई की सरकार में बाजपेयी जी को विदेश मंत्री और लाल कृष्ण आडवाणी को सूचना प्रसारण मंत्री बनाया गया. हालांकि गठबंधन की सरकार अधिक दिनों तक नहीं चल पाई और 1979 में मोरारजी सरकार गिर गई. उसके बाद अगले ही साल यानी 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की गई. इस दिन को चुनने के पीछे कारण था कि 6 अप्रैल को ही महात्मा गांधी ने नमक कानून तोड़ा था. अटल बिहारी बाजपेयी बीजेपी के पहले अध्यक्ष रहे. लगातार 6 साल तक बाजपेयी जी ने बीजेपी की बागडोर संभाली. उसके बाद लाल कृष्ण आडवाणी बीजेपी की अध्यक्ष बनाए गए.

1984 में बीजेपी ने दो सीटों पर लहराया परचम

1980 में पार्टी की स्थापना होने के 4 साल तक बीजेपी को एक भी सीट लोकसभा में नसीब नहीं हुई थी. लेकिन 1984 में बीजेपी ने दो सीट पर जीत दर्ज कर इतिहास रच डाला. इस चुनाव में मजेदार बात ये रही कि दोनों सीटों पर न तो बाजपेयी जी जीते थे और न ही लाल कृष्ण आडवाणी ने जीती थी. बल्कि गुजरात के मेहसाणा से अमृतलाल कालिदास पटेल ने जीत दर्ज की थी और आंध्र प्रदेश के हनामकोंडा से चंदूपाटिया जंगा रेड्डी ने जीत दर्ज की थी.

1984 के बाद लगातार बढ़ती गयी बीजेपी की सीटें

1984 में दो सीट जीतने के बाद बीजेपी की शक्ति लोकसभा में लगातार बढ़ती गई. 1989 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 85 सीटों पर जीत दर्ज की. उसके बाद 1991 में 120, 1996 में 161, 1999 में बीजेपी को 182 सीटें मिलीं. हालांकि 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को नुकसान का सामना करना पड़ा और पार्टी को केवल 138 सीटें ही मिलीं. उसके बाद कुछ दिनों तक बीजेपी का ग्राफ नीचे गिरता गया और 2009 के चुनाव में बीजेपी को केवल 116 सीटें ही हासिल हुईं. 2014 में नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारतीय जनता पार्टी ने इतिहास रच डाला और लोकसभा की 543 सीटों में अकेले 282 सीटों पर जीत दर्ज की. पहली बार बीजेपी को अकेले दम पर लोकसभा में बहुमत मिली. फिर नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी ने 2019 का चुनाव लड़ा, जिसमें पार्टी ने ट्रिपल सेंचुरी जड़ दिया और अकेले 303 सीटों पर कब्जा जमा लिया. नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने. अब 2024 में उनकी अगुआई में बीजेपी लोकसभा चुनाव का ताल ठोक रही है. पीएम मोदी सहित बीजेपी पार्टी ने इस बार अकेले 370 सीट जीतने का दावा ठोका है, जबकि सहयोगी पार्टियों के साथ मिलकर 400 से अधिक सीट जीतने का दमखम दिखाया है.

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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