बाल ठाकरे होते तो थपथपाते पीएम मोदी की पीठ, आखिर सीएम शिंदे ने क्यों कही ये बात
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 09 Jan 2024 1:31 PM
**EDS: BEST QUALITY AVAILABLE PICTURE**Mumbai: Maharashtra Chief Minister Eknath Shinde visits the Coastal Road Project tunnel, in Mumbai, Sunday, Jan. 7, 2024. (PTI Photo)(PTI01_07_2024_000060B)
एकनाथ शिंदे ने जून 2022 में बगावत कर बीजेपी से हाथ मिला लिया था. इसके बाद बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई थी. इसके बाद से उद्धव गुट के साथ उनकी तल्खी देखी जा रही है. अब बाल ठाकरे का जिक्र करते हुए शिंदे ने बड़ी बात कही है.
अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले बयानों का दौर जारी है. इस क्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से ऐसी बात कही गई है जिससे उद्धव ठाकरे गुट नाराज हो सकता है. दरअसल, सीएम शिंदे ने कहा है कि यदि शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे आज जिंदा होते तो वह राम मंदिर निर्माण और अनुच्छेद 370 हटाने के लिए पीएम मोदी की तारीफ तो करते ही, साथ ही पीठ भी थपथपाते…आपको बता दें कि शिवसेना आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए ‘शिव संकल्प’ अभियान का आयोजन करके लोगों को अपने पक्ष में करे में जुटी है. इसी दौरान सोमवार को रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग के राजापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम शिंदे की ओर से उक्त बातें कही गई.
बालासाहेब ठाकरे के विचारों के असली वंशज कौन?
बालासाहेब ठाकरे के विचारों के असली वंशज कौन? इस सवाल का जवाब सीएम शिंदे ने दिया और कहा कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना और राम मंदिर निर्माण बाला साहेब ठाकरे के सपानों में से एक था जो मोदी सरकार के कार्यकाल में पूरा हो चुका है. यदि आज बालासाहेब ठाकरे जिंदा होते तो वह पीएम मोदी की पीठ थपथपाते नजर आते…आपको बता दें कि बाला साहेब ठाकरे का साल 2012 में निधन हो गया था. शिवसेना से बगावत कर अलग पार्टी बनाने पर एकनाथ शिंदे ने कहा कि उन्होंने स्वार्थ साधने के लिए कोई कदम नहीं उठाया, बल्कि बालासाहेब के विचारों को जिंदा रखने के लिए ऐसे कदम उठाने की जरूरत पड़ी. उन्होंने कहा कि हम बालासाहेब के विचारों के असल वंशज हैं. जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने शिवसेना के खाते में पड़े 50 करोड़ रुपये की डिमांड की तो हमारी ओर से पैसे दे दिए गये क्योंकि हम यहां पैसों के लिए नहीं हैं.
कब टूटी थी शिवसेना?
यदि आपको याद हो तो एकनाथ शिंदे ने जून 2022 में बगावत कर बीजेपी से हाथ मिला लिया था. इसके बाद बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई थी. इसके बाद शिवसेना दो धड़ों में बंट गई थी. एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के चुनाव चिन्ह और नाम पर दावा किया, जिसे चुनाव आयोग ने सही माना और पार्टी का चुनाव चिन्ह और नाम शिंदे गुट की शिवसेना को देने का काम किया. वहीं उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नाम से जाना जाता है जिसका चुनाव चिन्ह जलती हुई मशाल है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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