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आजादी का अमृत महोत्सव : साबरमती से पीएम मोदी ने बताया नमक का महत्व, कहा - 'हमने देश का नमक खाया है'

Updated at : 12 Mar 2021 12:57 PM (IST)
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आजादी का अमृत महोत्सव : साबरमती से पीएम मोदी ने बताया नमक का महत्व, कहा - 'हमने देश का नमक खाया है'

Azadi Ka Amrit Mahotsava : प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि किसी राष्ट्र का भविष्य तभी उज्ज्वल होता है, जब वो अपने अतीत के अनुभवों और विरासत के गर्व से पल पल जुड़ा रहता है. फिर भारत के पास तो गर्व करने के लिए अथाह भंडार है, समृद्ध इतिहास है, चेतनामय सांस्कृतिक विरासत है.

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  • साबरमती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की दांडी यात्रा की शुरुआत

  • अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया देश के नमक का महत्व

  • प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से बताया देश की आजादी का महत्व

Azadi Ka Amrit Mahotsava : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को आजादी के 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर गुजरात के साबरमती से दांडी यात्रा की शुरुआत के पहले नमक के महत्व को बतलाया. साबरमती से आजादी के अमृत महोत्सव का आगाज करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आजादी का अमृत महोत्सव यानी आजादी की ऊर्जा का अमृत, आजादी का अमृत महोत्सव यानी स्वाधीनता सेनानियों से प्रेरणाओं का अमृत, आजादी का अमृत महोत्सव यानी नए विचारों का अमृत, नए संकल्पों का अमृत, आजादी का अमृत महोत्सव यानी आत्मनिर्भरता का अमृत’ है.

गर्व करने के लिए अथाह भंडार

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि किसी राष्ट्र का भविष्य तभी उज्ज्वल होता है, जब वो अपने अतीत के अनुभवों और विरासत के गर्व से पल पल जुड़ा रहता है. फिर भारत के पास तो गर्व करने के लिए अथाह भंडार है, समृद्ध इतिहास है, चेतनामय सांस्कृतिक विरासत है. उन्होंने कहा कि 1857 का स्वतंत्रता संग्राम, महात्मा गांधी का विदेश से लौटना, देश को सत्याग्रह की ताकत फिर याद दिलाना, लोकमान्य तिलक का पूर्ण स्वराज्य का आह्वान, सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज का दिल्ली मार्च, दिल्ली चलो का नारा कौन भूल सकता है.

नमक हमारे यहां श्रम और समानता का है प्रतीक

प्रधानमंत्री मोदी ने साबरमती से दांडी यात्रा की शुरुआत के पहले नमक का महत्व बताते हुए कहा, ‘हम आज भी कहते हैं कि हमने देश का नमक खाया है. ऐसा इसलिए नहीं, क्योंकि नमक कोई बहुत कीमती चीज है. ऐसा इसलिए, क्योंकि नमक हमारे यहां श्रम और समानता का प्रतीक है.’ उन्होंने कहा, ‘हमारे यहां नमक को कभी उसकी कीमत से नहीं आंका गया. हमारे यहां नमक का मतलब है ईमानदारी. हमारे यहां नमक का मतलब है विश्वास. हमारे यहां नमक का मतलब है वफादारी’.

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भक्ति आंदोलन ने तैयार की थी राष्ट्रव्यापी स्वाधीनता आंदोलन की पीठिका

उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र का भविष्य तभी उज्ज्वल होता है, जब वो अपने अतीत के अनुभवों और विरासत के गर्व से पल पल जुड़ा रहता है. फिर भारत के पास तो गर्व करने के लिए अथाह भंडार है, समृद्ध इतिहास है, चेतनामय सांस्कृतिक विरासत है. उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन की इस ज्योति को निरंतर जागृत करने का काम, पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, हर दिशा में, हर क्षेत्र में, हमारे संतो-महंतों, आचार्यों ने किया था. एक प्रकार से भक्ति आंदोलन ने राष्ट्रव्यापी स्वाधीनता आंदोलन की पीठिका तैयार की थी.

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Posted by : Vishwat Sen

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