असम : चुनावी मौसम में चाय बागान मजदूरों को लुभाने की होड़

Updated at : 05 Apr 2026 5:53 PM (IST)
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Assam Tea Garden

मंत्री शिवराज सिंह चौहान चाय बागान में श्रमिकों के साथ (Photo: PTI)

Assam Election 2026 : असम में विधानसभा चुनाव से पहले सभी पॉलिटिकल पार्टी चाय बागान के मजदूरों को अपने पक्ष में करने में जुट गए हैं. ये बड़ा वोट बैंक माना जाता है, जो कई सीटों का रिजल्ट तय कर सकता है. इसलिए पार्टियां इनका समर्थन पाने के लिए पूरी कोशिश कर रही हैं.

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Assam Election 2026 : असम के चाय बागानों में करीब 35 लाख वोटर हैं. इनका खासकर पूर्वी असम की 35 से ज्यादा सीटों पर अच्छा असर है. ये लोग 126 सीटों वाली विधानसभा की कम से कम 10 और सीटों का रिजल्ट भी प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में इनकी पुरानी मांगें (जैसे एसटी का दर्जा, ज्यादा मजदूरी और जमीन के अधिकार) फिर से चुनावी मुद्दा बन गई हैं.

सत्ताधारी बीजेपी कह रही है कि पिछले 10 साल में उसने चाय बागान मजदूरों के लिए काफी काम किया है और उनकी जिंदगी में बड़ा सुधार आया है. पार्टी खास तौर पर बागानों के अंदर जमीन के अधिकार देने को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है. भाजपा चाय बगान मोर्चा के अध्यक्ष दुलेन नायक ने कहा कि अब स्कूल, सड़क और कई सरकारी योजनाएं पहुंची हैं. इससे हालात बदले हैं. उनका कहना है कि अब इस समुदाय को पहले की तरह दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं माना जाता और शिक्षा से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक काफी सुधार हुआ है.

बीजेपी ने क्या किया है वादा?

बीजेपी ने अपने कार्यकाल में चाय बागान मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने पर भी जोर दिया. ब्रह्मपुत्र घाटी में ये 126 रुपये से बढ़कर 280 रुपये और बराक घाटी में 105 से 258 रुपये हो गई. पार्टी ने वादा किया है कि फिर सत्ता में आने पर मजदूरी को धीरे-धीरे 500 रुपये तक किया जाएगा. इसके अलावा नौकरियों में आरक्षण, मेडिकल कॉलेजों में सीट और झूमोइर नृत्य जैसी संस्कृति को बढ़ावा देने के कदम भी गिनाए गए हैं.

जमीन पर कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा : कांग्रेस

वहीं कांग्रेस का कहना है कि इन सुधारों से जमीन पर कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा. असम चाय मजदूर आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अतुवा मुंडा ने जमीन के अधिकार वाले कदम को सिर्फ दिखावा बताया. उनका आरोप है कि जो ‘डिजिटल पट्टे’ दिए गए हैं, वे कानूनी रूप से सही नहीं हैं. इसमें सही प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई. उन्होंने कहा कि इससे आगे चलकर मजदूरों और बागान मालिकों के बीच विवाद बढ़ सकते हैं. उनके मुताबिक ये कोई स्थायी समाधान नहीं, बल्कि चुनाव से पहले किया गया दिखावटी कदम है.

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कांग्रेस ने क्या किया है वादा

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया है कि चाय बागान मजदूरों को एसटी का दर्जा दिया जाएगा. साथ ही उनकी मजदूरी बढ़ाकर औद्योगिक न्यूनतम स्तर तक की जाएगी. ज्यादा सरकारी सुविधाएं देकर इस सेक्टर को फिर से मजबूत बनाया जाएगा. इस बीच, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) जैसे छोटे दल भी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं, जिनका लक्ष्य चाय बागान जनजातियों के वोट बैंक को अपने पक्ष में करना है. हालांकि, इसका चुनावी प्रभाव अभी अनिश्चित है.

एसटी दर्जा और मजदूरी बढ़ाने जैसे बड़े मुद्दे अभी भी जस के तस

सभी पार्टियां जोर लगा रही हैं, लेकिन एसटी दर्जा और मजदूरी बढ़ाने जैसे बड़े मुद्दे अभी भी जस के तस हैं. चाय बागान का यह समुदाय काफी ताकतवर वोट बैंक है, इसलिए वे सोच-समझकर फैसला लेने की तैयारी में हैं. असम में 9 अप्रैल को वोटिंग होनी है और 4 मई को नतीजे आएंगे, जिससे तय होगा कि आगे की राजनीति किस दिशा में जाएगी.

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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