असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी एकता पर किया तीखा हमला, बताया ‘चौधरियों की जमात’

असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्षी एकता के नाम पर सिर्फ बड़े ‘चौधरियों की जमात ’ बनायी जा रही है, लेकिन बीजेपी को हराने के लिए कोई योजना नहीं दिख रही है.
एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने आज विपक्षी एकता पर तीखा प्रहार किया और कहा कि हमारी पार्टी समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध करेगी. अगर विपक्षी दल बीजेपी को हराना चाहते हैं, तो आपको यह बात खुलकर करनी और कहनी होगी कि आप बीजेपी के एजेंडे का विरोध करते हैं. लेकिन विपक्षी दल इस तरह का व्यवहार नहीं कर रहे हैं.
असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्षी एकता के नाम पर सिर्फ बड़े ‘चौधरियों की जमात ’ बनायी जा रही है, लेकिन बीजेपी को हराने के लिए कोई योजना नहीं दिख रही है. अगर विपक्ष एकजुट हो रहा है तो तेलंगाना के सीएम केसीआर को बैठक में आमंत्रित क्यों नहीं किया गया. वे कोई आम इंसान नहीं बल्कि राजनीति के बड़े खिलाड़ी हैं.
#WATCH | Our party will oppose UCC…If you (opposition parties) want to defeat BJP then you have to show the difference that you will not follow the agenda set by BJP. They (opposition parties) are a club of big 'Chaudharis'. You have not invited our Telangana CM to the meeting.… pic.twitter.com/ABGOvfPbVV
— ANI (@ANI) July 15, 2023
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को शिकस्त देने के लिए विपक्ष एकजुट हो रहा है. इसी क्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर देश के 15 बड़े पार्टियों के नेता पटना पहुंचे और बीजेपी को शिकस्त देने के लिए मंच साझा किया. हालांकि इस बैठक में कई एेसे मुद्दे भी सामने आये जो विपक्षी एकता पर सवाल खड़े होने वाले थे. आगामी 18 जुलाई को बेंगलुरु में विपक्ष की बैठक होने वाली है.
पटना बैठक में 15 विपक्षी पार्टियां एकजुट तो हुईं लेकिन आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने यह कहा कि वे इस मिशन में तभी शामिल होंगे जब सभी पार्टियां संसद में उस अध्यादेश का विरोध करें, जो केंद्र सरकार सेवा मामले को लेकर दिल्ली सरकार के विरुद्ध लेकर आयी है. हालांकि अरविंद केजरीवाल के इस प्रस्ताव के विरोध में सबसे पहले नेशनल काॅन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला आये और उन्होंने कहा कि जब जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 लेकर केंद्र सरकार आयी थी तो क्या आम आदमी पार्टी ने उसका विरोध किया था? वे अब कैसे ये उम्मीद कर रहे हैं कि जब उनपर बात आयी है तो हम हर पार्टी उनके साथ खड़ी होगी.
विपक्षी एकता की बैठक में एक और सवाल अनुत्तरित रहा कि विपक्ष का नेता कौन होगा. इस मसले पर राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष की बैठक एकजुटता के लिए हुई है, अभी नेता के चेहरे को लेकर कोई चर्चा नहीं है. लेकिन इस बयान में कितनी सच्चाई है, इस बात से सभी वाकिफ हैं. पटना बैठक में राजद सुप्रीमो लालू यादव ने हालांकि यह कहा कि राहुल गांधी को शादी कर लेनी चाहिए हम सब बाराती बनेंगे. लालू यादव के इस बयान के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं और यह कहा जा रहा है कि वे राहुल गांधी को विपक्ष का नेता घोषित कर चुके हैं. हालांकि इस मसले पर विवाद बहुत है, क्योंकि विपक्ष में ममता बनर्जी, अरविंद केजरवाल, नीतीश कुमार और शरद पवार जैसे दिग्गज भी शामिल हैं. ऐसे में अगर असदुद्दीन ओवैसी उनकी एकजुटता पर सवाल उठा रहे हैं तो गलत नहीं होगा.
18 जुलाई को विपक्षी दलों की बैठक बेंगलुरू में आयोजित की जा रही है. बताया जा रहा है कि इस बैठक में 24 विपक्षी दल शामिल होंगे. पहले एेसी सूचना आ रही थी कि तृणमूल कांग्रेस की नेता और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बैठक में शामिल नहीं होंगी. लेकिन बाद में ममता बनर्जी ने यह कंफर्म किया है कि वे इस बैठक का हिस्सा होंगी. इसमें कोेई दो राय नहीं है कि अगर ममता बनर्जी का साथ विपक्ष को मिला तो निश्चित तौर पर उनकी ताकत बढ़ेगी. 18 जुलाई की मीटिंग को लेकर विपक्ष बहुत उत्सुक है, यही वजह है कि सोनिया गांधी भी 18 जुलाई की बैठक में शामिल होंगी. हालांकि काफी समय से सोनिया गांधी का स्वास्थ्य बेहत��� नहीं चल रहा है और वे मीटिंग और सभाओं से दूर रहती हैं, लेकिन विपक्षी एकता को मजबूती देने के लिए सोनिया गांधी बेंगलुरू की बैठक में शामिल होंगी.
वहीं विपक्षी एकता को तोड़ने और उसका जवाब देने के लिए सत्तापक्ष ने भी कवायद शुरू कर दी है. ज्ञात हो कि 18 जुलाई को भाजपा ने एनडीए के सहयोगी दलों की बैठक बुलाई है. यह बैठक भी बेंगलुरू में आयोजित की जायेगी जिसमें सत्ता पक्ष अपना शक्ति प्रदर्शन करेगा. बताया जा रहा है कि इस बैठक की अधयक्षता पीएम नरेंद्र मोदी करेंगे. बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस बैठक के लिए सभी सहयोगियों को आमंत्रण भेजना शुरू कर दिया है. सहयोगियों को एकजुट करने की कोशिश में जेपी नड्डा ने उन सहयोगियों को भी आमंत्रण भेजा है जो कुछ समय से नाराज चल रहे थे, इनमें चिराग पासवान और जीतन राम मांझी शामिल हैं. इनके साथ ही बिहार से उपेंद्र कुशवाहा और वीआईपी पार्टी के मुकेश सहनी को भी बैठक में बुलाये जाने की संभावना है. कयास यह भी लगाये जा रहे हैं कि एनडीए की बैठक में पुराने साथी अकाली दल और चंद्रबाबू नायडू को भी बुलाया जायेगा.
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लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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